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उत्तराखंड: कचरे के ढेर से प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट, नगर पालिका पर लापरवाही का लगे आरोप
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तराखंड: गंगोलीहाट आस्था का केंद्र और मां हाट कालिका की पावन नगरी आज 'कूड़ा नगरी' बनने की कगार पर है।
विस्तार
उत्तराखंड: गंगोलीहाट आस्था का केंद्र और मां हाट कालिका की पावन नगरी आज 'कूड़ा नगरी' बनने की कगार पर है। नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि जिस जनता के टैक्स से सिस्टम चलता है। आज वही जनता जहरीली हवा और प्रदूषित पानी पीने को मजबूर है। नगर पालिका और उसके ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। होली के समय से कूड़े के ढेर में लगी आग जब हफ्तों बाद भी नहीं बुझी, तो प्रशासन ने एक नया और खतरनाक 'जुगाड़' निकाला— सुलगते हुए कूड़े को ऊपर से मिट्टी डालकर ढक दिया गया है। अंदर ही अंदर सुलग रहा कूड़ा कभी भी 'मीथेन ब्लास्ट' या भयंकर धसान का कारण बन सकता है। मिट्टी डालना समाधान नहीं, बल्कि अपनी नाकामियों को जिंदा दफन करने की कोशिश है। कूड़े का यह काला साम्राज्य राजकीय इंटर कॉलेज (GIC) के ठीक सामने और नेशनल हाईवे (NH) के किनारे फैला हुआ है। स्कूल के मासूम बच्चे दिन भर बदबू और सुलगती आग के धुएं के बीच बैठने को मजबूर हैं। क्या यही हमारा विकास है। गंगोलीहाट की लाइफलाइन साली खेत पेयजल योजना के मुहाने तक कूड़े का रिसाव पहुंच चुका है। हाईवे किनारे फेंकी जा रही गंदगी सीधे जल स्रोतों में रिस रही है, जब हम सफाई का टैक्स दे रहे हैं, तो डंपिंग जोन बनाने में नगर पालिका 'शून्य' क्यों है। ठेकेदारों की इतनी मनमानी क्यों कि जनता की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। टैक्सी स्टैंड और मुख्य बाजार के पास इस गंदगी के साम्राज्य का जिम्मेदार कौन।