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मध्य प्रदेश: पोरसा क्षेत्र में भक्ति की गूंज, श्रीमद् भागवत कथा में कृष्ण जन्म और बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh Tomar , मध्य प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 20/04/2026 01:40:40 pm Share:
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भगवान को अवतार लेना पड़ता है”—इसी संदेश के साथ ग्राम इन्नी खेरा (रजौधा) स्थित श्री जगन्नाथ बगिया में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वाता

विस्तार

मध्य प्रदेश: जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भगवान को अवतार लेना पड़ता है”—इसी संदेश के साथ ग्राम इन्नी खेरा (रजौधा) स्थित श्री जगन्नाथ बगिया में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथा के दौरान आचार्य सुनील मिश्रा शास्त्री ने भगवान कृष्ण के जन्म और उनकी बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण और विस्तृत वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कंस के अत्याचार और भगवान का अवतार आचार्य शास्त्री ने बताया कि जब कंस का अत्याचार चरम पर पहुंच गया, तब भगवान विष्णु को पृथ्वी पर कृष्ण के रूप में अवतरित होना पड़ा। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा की कारागार में मध्य रात्रि को हुआ। उनके जन्म के समय चमत्कारिक घटनाएं घटीं—कारागार के बंधन स्वतः खुल गए और पहरेदार गहरी नींद में सो गए।

वासुदेव द्वारा गोकुल पहुंचाए गए कृष्ण जन्म के बाद पिता वासुदेव नवजात कृष्ण को लेकर यमुना पार गोकुल पहुंचे, जहां नंद बाबा के घर जन्मी कन्या को लेकर वे वापस मथुरा लौट आए। जब सुबह कंस को इस घटना की जानकारी मिली, तो उसने उस कन्या को मारने का प्रयास किया, लेकिन वह कन्या आकाश में प्रकट होकर दिव्य स्वर में बोली—“हे कंस, तेरा संहार करने वाला जन्म ले चुका है।” इसके बाद कंस भयभीत हो उठा और उसने मथुरा में जन्मे अनेक नवजात बालकों का वध करवा दिया। पूतना वध और बाल लीलाएं

कथा में पूतना वध का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य शास्त्री ने बताया कि पूतना ने विषैले दूध से बालक कृष्ण को मारने का प्रयास किया, लेकिन भगवान कृष्ण ने उसका अंत कर दिया।
इसके साथ ही उन्होंने माखन चोरी, कालिया नाग दमन, और अन्य बाल लीलाओं का सजीव चित्रण किया। कथा के दौरान श्रद्धालु “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” जैसे भजनों पर झूम उठे। भक्ति के साथ सामाजिक संदेश आचार्य सुनील मिश्रा शास्त्री ने कथा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को वृक्षारोपण अवश्य करना चाहिए, क्योंकि वृक्षों से मिलने वाली छाया और ऑक्सीजन मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। ग्रामवासियों का सराहनीय सहयोग

इस भव्य धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में श्रीमती गिरिजा देवी गज सिंह तोमर सहित गांव के अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कथा की व्यवस्थाओं में सत्यवान सिंह तोमर, चंद्रभान सिंह तोमर, राजेश सिंह तोमर, बृजेश सिंह तोमर, रामकिशोर सिंह तोमर, दद्दू सहित समस्त ग्रामवासियों और श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, आस्था और उल्लास का ऐसा वातावरण बना रहा, जिसने हर किसी को कृष्णमय कर दिया।
 

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