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मध्य प्रदेश: बहुजन आंदोलन के लिए परिवार तक खोया, बदले में मिली बदनामी; राहुल नवरंग का मामला राजाराम साहब तक पहुंचा

- Photo by : social media

मध्य प्रदेश  Published by: Fulchand Malviya , मध्य प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 04/07/2026 05:43:58 pm Share:
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  • Published by.: Fulchand Malviya ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 04/07/2026 05:43:58 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: बहुजन आंदोलन की राजनीति में इस समय एक ऐसा दर्दनाक और संवेदनशील मामला पूरी तरह गरमा गया है, जिसने पूरी सांगठनिक व्यवस्था और नेताओं की मानसिकता को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

विस्तार

मध्य प्रदेश: बहुजन आंदोलन की राजनीति में इस समय एक ऐसा दर्दनाक और संवेदनशील मामला पूरी तरह गरमा गया है, जिसने पूरी सांगठनिक व्यवस्था और नेताओं की मानसिकता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मिशन महाराजा बलि सेना के निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल नवरंग से जुड़ा विवाद अब केवल एक political लड़ाई नहीं रहा, बल्कि यह बहुजन आंदोलन के एक समर्पित कार्यकर्ता के खून-पसीने, उसके परिवार के सर्वोच्च बलिदान और बदले में मिले धोखे की दास्तान बन चुका है। यह पूरा मामला अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के केंद्रीय प्रभारी, पूर्व राज्यसभा सांसद, पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व एमएलसी राजाराम साहब के पास पहुंच चुका है, जिसके बाद देवास, भोपाल से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा हुआ है। अपनों को कांधा भी नहीं दे पाए, इंगेजमेंट तक तोड़ दी; बहुजन आंदोलन के लिए सर्वस्व न्योक्षावर

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे का जो सबसे दर्दनाक और हैरान करने वाला सच सामने आया है, उसे सुनकर किसी भी व्यक्ति की आंखें नम हो जाएंगी। राहुल नवरंग ने देवास से लेकर पूरे प्रदेश में बहुजन आंदोलन को मजबूत करने और इसके अधिकारों की रक्षा के लिए न केवल अपने परिवार को दांव पर लगाया, बल्कि अपने व्यक्तिगत जीवन की खुशियों की भी आहुति दे दी। बहुजन आंदोलन के प्रति उनका समर्पण इस हद तक था कि इस आंदोलन की राह में उनके परिवार के भीतर एक के बाद एक मौतें होती गईं, घर में मातम छाया रहा, लेकिन इस मिशन को अपनी पहली प्राथमिकता मानने वाले राहुल नवरंग अपने कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं हुए। क्रूर परिस्थितियों और मिशन की व्यस्तताओं के चलते वे इतने मजबूर हुए कि संकट के उस दौर में वे अपनों को आखिरी बार कांधा तक नहीं दे पाए।


उन्होंने आंदोलन के लिए अपनी जीवन संगिनी तक का त्याग कर दिया और अपनी इंगेजमेंट (सगाई) तक तोड़ दी। कई बार ऐसी परिस्थितियां आईं जब घर पर विपदा टूटी, अपनों की लाशें उठीं, लेकिन वह घर नहीं गए। उन्होंने अपने व्यक्तिगत दुखों, वैवाहिक जीवन की खुशियों और अपनी भावनाओं का गला घोंटकर अपना पूरा समय, अपनी जवानी और अपना सर्वस्व बहुजन आंदोलन को दे दिया। उन्होंने इसके बावजूद कभी हिम्मत नहीं हारी और लगातार इस आंदोलन की आवाज बुलंद करते रहे। पर्दे के पीछे से विरोध और राजकुमार जाटव (संविधान समाचार) की अभद्रता मामले में एक और सनसनीखेज खुलासा यह हुआ है कि राहुल नवरंग को चौतरफा घेरने और बदनाम करने के लिए इंदौर के नेताओं से खास तौर पर संपर्क साधा गया था। ये नेता सीधे सामने आने के बजाय पर्दे के पीछे छिपकर राहुल नवरंग का लगातार विरोध कर रहे थे और उनके खिलाफ माहौल बना रहे थे। 

साजिश का स्तर इतना गिर गया कि इस पूरे मामले में 'संविधान समाचार' चैनल चलाने वाले राजकुमार जाटव को भी शामिल कर लिया गया। जबकि सच्चाई यह है कि राजकुमार जाटव का इस पूरे विवाद या मामले से दूर-दूर तक कोई सीधा लेना-देना नहीं था। इसके बावजूद, पर्दे के पीछे सक्रिय गुट के बहकावे और शह पर आकर राजकुमार जाटव ने भी मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं और राहुल नवरंग व उनके जुड़े लोगों को सरेआम गाली-गलौज बकी और अभद्र व्यवहार किया। इस हरकत ने साफ कर दिया कि राहुल नवरंग को मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए कितने निचले स्तर की गुटबाजी की जा रही थी
साल 2016-17 में निष्कासित लक्ष्मी नायक को दोबारा पार्टी में किया शामिल, शिकायत करने पर पीड़ित पर ही हुई कार्रवाई
राजनीति का क्रूर और पक्षपाती चेहरा देखिए कि जिस व्यक्ति ने बहुजन आंदोलन के लिए अपनी सगाई तोड़ दी, अपनों को कांधा तक नहीं दे पाया, अपनी खुशियां और अपना पूरा परिवार खो दिया, उसे बदले में सम्मान और न्याय मिलने के बजाय सिर्फ और सिर्फ बदनामी मिली
मामला तब और गंभीर हो गया जब भोपाल में लक्ष्मी नायक द्वारा राहुल नवरंग के साथ घोर बदतमीजी की गई और उन्हें अपमानित करने के लिए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा और हैरान करने वाला पहलू यह है कि लक्ष्मी नायक को उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण साल 2016-17 में ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। लेकिन अंदरूनी सांठगांठ के चलते उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया गया
जब राहुल नवरंग ने दोबारा पार्टी में शामिल की गईं लक्ष्मी नायक की इस घोर अभद्रता की शिकायत सीधे बसपा के मध्य प्रदेश अध्यक्ष रमाकांत पीपल से की, तो न्याय की उम्मीद पूरी तरह टूट गई। प्रदेश अध्यक्ष रमाकांत पीपल ने आरोपी पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा पीड़ित राहुल नवरंग के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया और उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर दी।

इतना ही नहीं, इस पूरे घटनाक्रम के भीतर बैठे कुछ स्वार्थी तत्वों और देवास, इंदौर से लेकर भोपाल तक के नेताओं के एक पूरे गुट ने मिलकर राहुल नवरंग और उनके लोगों को बहुजन आंदोलन के भीतर पूरी तरह बदनाम करने की एक घटिया और सोची-समझी साजिश रची। जिस नेतृत्व ने इस आंदोलन के लिए अपना घर-परिवार सब उजाड़ दिया, उसे ही बदनाम करने का यह खेल खेला गया इसी जातिवादी मानसिकता और आंतरिक गुटबाजी से आहत होकर उन्होंने भारी दुख के साथ बसपा को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था
अब राजाराम साहब की अदालत में होगा इंसाफ
अब जब प्रदेश अध्यक्ष रमाकांत पीपल की उल्टी कार्रवाई, इंदौर-भोपाल-देवास के नेताओं की पर्दे के पीछे की साजिश, राजकुमार जाटव की गाली-गलौज, दोबारा पार्टी में शामिल की गईं लक्ष्मी नायक की अभद्रता और नवरंग परिवार के इस महान व ऐतिहासिक बलिदान से जुड़े तमाम पुख्ता दस्तावेज बसपा के कद्दावर नेता केंद्रीय प्रभारी राजाराम साहब के पास पहुंचे हैं, तो यह मुद्दा पूरी तरह से सुलग उठा है।**

**राजाराम साहब संगठन के भीतर अपनी निष्पक्ष और कड़क छवि के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में लंबे समय।