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राजस्थान: शीतला अष्टमी व होली पर पारंपरिक लोक गैर नृत्य प्रतियोगिता का हुआ भव्य आयोजन

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राजस्थान  Published by: Pappu Lal Sharma , Date: 13/03/2026 01:32:35 pm Share:
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  • 13/03/2026 01:32:35 pm
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संक्षेप

राजस्थान: फूलियाकलां कस्बे में शीतला अष्टमी एवं होली पर्व के अवसर पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्राम पंचायत के तत्वावधान में गढ़ के चौक में पारंपरिक लोक सांस्कृतिक गैर नृत्य प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया।

विस्तार

राजस्थान: फूलियाकलां कस्बे में शीतला अष्टमी एवं होली पर्व के अवसर पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्राम पंचायत के तत्वावधान में गढ़ के चौक में पारंपरिक लोक सांस्कृतिक गैर नृत्य प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए ग्रामीणों और कलाकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए लोक संस्कृति की शानदार झलक रात्रि 9बजे से देर रात्रि तक प्रस्तुत की। प्रतियोगिता के दौरान फूलियाकलां,खैडाहेतम, गणपतिखैड़ा, चादमा और सणगारी सहित आसपास के गांवों से आए प्रतिभागियों ने गोलाकार बनाकर लकडियो से पारंपरिक गैर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। कलाकारों ने रंग-बिरंगी और आकर्षक पारंपरिक वेशभूषा धारण कर ढोल-नगाड़ों की थाप पर लकड़ियों के साथ तालमेल बिठाते हुए शानदार गैर नृत्य किया। कलाकारों के उत्साह और लयबद्ध प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा पूरा माहौल उत्सव और उमंग से सराबोर हो गया।

 

प्रतियोगिता में प्रतिभागियों के प्रदर्शन का निर्णय निर्णायक मंडल द्वारा किया गया। उत्कृष्ट प्रस्तुति देने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान से सम्मानित किया गया, जबकि अन्य प्रतिभागियों को भी सांत्वना पुरस्कार देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इस अवसर पर तहसीलदार रामदेव धाकड़, पंचायत प्रशासक रतनी देवी जाट, एडवोकेट विजय पाराशर और रामधन सरूडिया ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। गैर नृत्य प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागी हबीब खां ने बताया कि यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है और इसमें उनके पिता और दादा भी हिस्सा लेते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन कस्बे में सामाजिक सौहार्द और क़ौमी एकता का प्रतीक है, जिसमें सभी जाति और धर्म के लोग मिलकर भाग लेते हैं। हिंदू-मुस्लिम युवक, बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, जिससे आपसी भाईचारा और मजबूत होता है। कार्यक्रम के दौरान कस्बे सहित आसपास के गांवों से सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और बच्चे, गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। आयोजन ने वर्षों पुरानी लोक सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बनाए रखते हुए ।शीतला अष्टमी और होली के पर्व को और अधिक उल्लासमय बना दिया।


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