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उत्तर प्रदेश: अंबेडकरनगर में सरकारी भूमि पर कब्जे के आरोप, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: सरकारी जमीनों पर कब्जे का खेल या प्रशासन की चुप्पी? आखिर कब टूटेगा भूमाफियाओं का शिकंजा। जलालपुर तहसील के अंतर्गत भियाव ब्लॉक की ग्राम सभा मढवरपुर एवं चक अजभुजगी में सरकारी संपत्तियों पर कथित अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: सरकारी जमीनों पर कब्जे का खेल या प्रशासन की चुप्पी? आखिर कब टूटेगा भूमाफियाओं का शिकंजा। जलालपुर तहसील के अंतर्गत भियाव ब्लॉक की ग्राम सभा मढवरपुर एवं चक अजभुजगी में सरकारी संपत्तियों पर कथित अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। आरोप है कि तालाब गाटा संख्या 78, बंजर भूमि गाटा संख्या 29 व 33 तथा चक मार्ग संख्या 37 पर कब्जा कर सरकारी भूमि के अस्तित्व को चुनौती दी जा रही है।ग्रामीणों का कहना है कि जिस तालाब और सार्वजनिक भूमि की रक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की है, वही भूमि आज अतिक्रमण के साए में दिखाई दे रही है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर शिकायतों और चर्चाओं के बावजूद कार्रवाई की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है? क्या भूमाफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि सरकारी जमीनें भी सुरक्षित नहीं रहीं? क्षेत्र में चर्चा है कि यदि राजस्व अभिलेखों के अनुसार भूमि सार्वजनिक श्रेणी की है, तो उसे तत्काल कब्जामुक्त कराया जाना चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि चक मार्ग और तालाब जैसे सार्वजनिक संसाधनों पर कब्जे से गांव के विकास और आम लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल — क्या तहसील प्रशासन और राजस्व विभाग इस मामले में सख्त कदम उठाएंगे, या फिर सरकारी जमीनों पर कब्जे के आरोपों के बीच ग्रामीण न्याय की प्रतीक्षा करते रहेंगे? ग्रामीणों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, राजस्व अभिलेखों की सार्वजनिक जांच हो और यदि अवैध कब्जा पाया जाए तो तत्काल बुलडोजर कार्रवाई कर सरकारी भूमि को मुक्त कराया जाए।
