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उत्तर प्रदेश: गोंडा में आंगनबाड़ी, आशा और महिला कर्मियों का प्रदर्शन, PM को भेजा 7 सूत्रीय मांगपत्र
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: गोंडा में केंद्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर सोमवार को देवीपाटन मंडल मुख्यालय स्थित कचहरी परिसर में आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन, आशा कर्मचारी यूनियन और कामकाजी महिला सेवा समिति से जुड़ी महिला कर्मियों ने प्रदर्शन किया।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: गोंडा में केंद्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर सोमवार को देवीपाटन मंडल मुख्यालय स्थित कचहरी परिसर में आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन, आशा कर्मचारी यूनियन और कामकाजी महिला सेवा समिति से जुड़ी महिला कर्मियों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री को संबोधित सात सूत्रीय मांगपत्र प्रशासन के माध्यम से भेजा गया।प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं, मिनी आंगनबाड़ी कर्मियों, आशा, आशा संगिनी, रसोइयों, महिला मेट, समूह सखी, बीसी सखी और अन्य कामकाजी महिलाओं को न्यूनतम वेतन के दायरे में लाने की मांग की। इसके साथ ही उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और ग्रेच्युटी की सुविधा देने तथा परिवार सहित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई। मांगपत्र में आंगनबाड़ी कर्मियों से विभागीय जिम्मेदारियों के अलावा अन्य कार्य नहीं लेने की मांग भी शामिल रही। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बच्चों के पोषण आहार की स्थानीय स्तर पर महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। डिजिटल कार्यों को सुचारु रूप से करने के लिए लैपटॉप उपलब्ध कराने के साथ विद्यालयों में बिजली और वाई-फाई जैसी आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने की मांग भी की गई। आशा और आशा संगिनी के लिए सभी कार्यों का समयबद्ध भुगतान करने तथा प्रोत्साहन राशि को दोगुना करने की मांग उठाई गई। वहीं विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों को उम्र सीमा के आधार पर हटाने पर रोक लगाने, उन्हें 12 महीने का मानदेय देने और वर्दी का भुगतान सीधे बैंक खातों में करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों तक राशन पहुंचाने के बदले पिछले तीन वर्षों से लंबित भुगतान तत्काल जारी करने की मांग भी रखी। इसके अलावा महिला मेट, समूह सखी, बीसी सखी और स्वास्थ्य सखी का मानदेय नियमित करने तथा शौचालय केयरटेकर का भुगतान भी सीधे बैंक खातों में भेजने की मांग की गई।मांगपत्र में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत गठित ग्राम संगठनों और सीएलएफ के आय-व्यय का ऑडिट कराने की मांग भी की गई। साथ ही मिशन से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की आय से अधिक संपत्ति की जांच कराने की मांग प्रधानमंत्री से की गई।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिला कर्मी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रही हैं। यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन आगे भी जारी रखेंगी। प्रदर्शन के दौरान महिला कर्मियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की।
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