Contact for Advertisement 9650503773


उत्तर प्रदेश: बरेली में DM का बड़ा एक्शन: टाइपिंग में फेल बाबू पदावनत, गबन आरोपी की नौकरी गई

- Photo by : SOCIAL MEDIA

उत्तर प्रदेश:  Published by: Rajnesh shrivastav , उत्तर प्रदेश:  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 17/09/2026 03:30:06 pm Share:
  • उत्तर प्रदेश:
  • Published by.: Rajnesh shrivastav ,
  • Edited By.: Kunal Tewatia,
  • Date:
  • 17/09/2026 03:30:06 pm
Share:

संक्षेप

उत्तर प्रदेश: जिले के प्रशासनिक महकमे में जिलाधिकारी अविनाश सिंह की सख्ती से हड़कंप मच गया है। सरकारी कामकाज में लापरवाही, निर्धारित मानकों पर खरा न उतरने और भ्रष्टाचार के मामलों

विस्तार

उत्तर प्रदेश: जिले के प्रशासनिक महकमे में जिलाधिकारी अविनाश सिंह की सख्ती से हड़कंप मच गया है। सरकारी कामकाज में लापरवाही, निर्धारित मानकों पर खरा न उतरने और भ्रष्टाचार के मामलों में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। डीएम ने मीरगंज तहसील में तैनात एक कनिष्ठ सहायक को तीन बार मौका दिए जाने के बावजूद टाइपिंग टेस्ट पास न करने पर पदावनत कर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर तैनात करने का आदेश दिया है। वहीं फरीदपुर में राजस्व वसूली की रकम के गबन के मामले में आरोपी एक अन्य कनिष्ठ सहायक की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। तीन मौके मिले, फिर भी टाइपिंग टेस्ट में फेल
मीरगंज तहसील में कनिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत रेहान खान को वर्ष 2021 में मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति मिली थी। कनिष्ठ सहायक के पद के लिए कंप्यूटर टाइपिंग का ज्ञान निर्धारित मानकों में शामिल है। विभाग की ओर से रेहान खान को अपनी टाइपिंग क्षमता सुधारने के लिए लगातार तीन अवसर दिए गए।

इसके बावजूद वह तीनों बार टाइपिंग टेस्ट में सफल नहीं हो सका। लगातार अवसर मिलने के बाद भी निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करने पर शासनादेश और संबंधित शासन निर्देशों के तहत कार्रवाई की गई। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने रेहान खान को कनिष्ठ सहायक पद से पदावनत करते हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर तैनात करने का आदेश जारी किया। इस कार्रवाई को प्रशासन में कार्यकुशलता और निर्धारित सेवा मानकों को लेकर सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। अमीनों से जमा राजस्व की रकम पर गड़बड़ी का आरोप, बाबू की गई नौकरी दूसरी बड़ी कार्रवाई फरीदपुर से जुड़े मामले में हुई। यहां कनिष्ठ सहायक पद पर तैनात रहे अंशु वर्मा (शर्मा) पर अमीनों द्वारा जमा कराई गई राजस्व वसूली की रकम को सरकारी खाते में जमा करने के बजाय अपने व्यक्तिगत खाते में डालकर हड़पने का आरोप था।

मामला वर्ष 2015-16 का है। उस समय कार्रवाई करते हुए अंशु वर्मा को सेवा से बर्खास्त किया गया था। इसके बाद मामला ट्रिब्यूनल पहुंच गया। ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद एडीएम सिटी की अध्यक्षता में दोबारा जांच कमेटी गठित की गई। पुनः जांच के दौरान आरोप पत्र में लगाए गए आरोपों की जांच की गई। प्रशासन के मुताबिक जांच में आरोप पूरी तरह सिद्ध पाए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने अंशु वर्मा (शर्मा) की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश दिया। तीन कर्मचारियों को मिली आखिरी मोहलत डीएम ने टाइपिंग में अपेक्षित सुधार नहीं कर पाने वाले अन्य कर्मचारियों को भी अंतिम अवसर दिया है। कंचित चौधरी, राहुल कुमार और लक्ष्मी सक्सेना को सहानुभूति के आधार पर दो महीने का समय दिया गया है।

इस अवधि में उन्हें कंप्यूटर टाइपिंग का प्रशिक्षण लेकर अपनी दक्षता सुधारनी होगी और निर्धारित टाइपिंग टेस्ट पास करना होगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दो महीने की समय सीमा समाप्त होने के बाद यदि संबंधित कर्मचारी टेस्ट में सफल नहीं होते हैं तो शासनादेश के अनुसार उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने दिया जीरो टॉलरेंस का संदेश
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप प्रशासन में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम किया जा रहा है। कार्यकुशलता में सुधार और सरकारी कार्यों में निर्धारित मानकों का पालन प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों को सुधार के लिए पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे, लेकिन लगातार अवसर मिलने के बाद भी यदि कोई कर्मचारी निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता है या भ्रष्टाचार में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बरेली प्रशासन की इन दो कार्रवाइयों से साफ है कि सरकारी विभागों में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर अब कार्रवाई केवल चेतावनी तक सीमित नहीं रहने वाली है। जहां जरूरत होगी, वहां पदावनति से लेकर सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जाएगी।