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उत्तर प्रदेश: वन नेशन, वन इलेक्शन पर सरकार का रोडमैप तैयार, पहले 20 राज्यों में एक साथ हो सकते हैं चुनाव
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: केंद्र सरकार देश में एक साथ चुनाव कराने की तैयारी में है. इसके लिए बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPS) से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, समिति टू -फेज ट्रांजिशन मॉडल पर विचार कर रही है. इससे राज्यों में बार-बार चुनाव कराने या विधानसभाओं के
विस्तार
उत्तर प्रदेश: केंद्र सरकार देश में एक साथ चुनाव कराने की तैयारी में है. इसके लिए बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPS) से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, समिति टू -फेज ट्रांजिशन मॉडल पर विचार कर रही है. इससे राज्यों में बार-बार चुनाव कराने या विधानसभाओं के कार्यकाल में बहुत बड़ी कटौती करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.पूरे देश को एक साथ चुनावी चक्र में लाने के बजाय दो- चरणों 2019 और 2034 में बढ़ने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है. पहले चरण में 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ करीब 20 राज्यों के विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं. संयुक्त संसदीय समिति की अवधि 2026 के मानसून सत्र तक बढ़ाई जा चुकी है. ऐसे में 2029 से चुनावी चक्र एक करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. वही, 2034 तक पूरे देश को साझा चुनावी चक्र में लाने का लक्ष्य है। बताते चलें कि एक राष्ट्र- एक चुनाव पर विचार करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर 2023 को एक पैनल का गठन किया गया था. इस पैनल ने हितधारकों- विशेषज्ञों के साथ चर्चा और 191 दिनों के शोध के बाद 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. 1952 से 1967 तक यानी चार बार लोकसभा व अधिकांश विधानसभा चुनाव साथ हुए. 1967 के बाद कई राज्यों में सरकारें गिरने लगीं. 1968- 69 में कई विधानसभाएं भंग हुईं और 1970 में लोकसभा भी कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग हो गई. इससे देश का साझा चुनावी चक्र बिखर गया. 1971 में लोकसभा के मध्य अवधि चुनाव हुए और राज्यों में चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे. बाद में गठबंधन सरकारों, राष्ट्रपति शासन और समय से पहले चुनाव ने अंतर और बढ़ा दिया. विधि आयोग और नीति आयोग समय-समय पर चुनावी चक्र एक करने की सिफारिश करते रहे हैं।
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