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उत्तर प्रदेश: देशभर की 22 हाई-सिक्योरिटी लैब में हुई बड़ी तैयारी, नया वायरस फैलने से पहले मिल सकेगा संकेत
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: अगली महामारी का इंतजार करने के बजाय भारत अब नए संक्रमण के शुरुआती संकेतों को समय रहते पकड़ने की तैयारी कर रहा है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: अगली महामारी का इंतजार करने के बजाय भारत अब नए संक्रमण के शुरुआती संकेतों को समय रहते पकड़ने की तैयारी कर रहा है। केंद्र सरकार ने नेशनल वन हेल्थ मिशन के तहत देशभर में 22 बीएसएल-3 और बीएसएल-4 हाई-कंटेनमेंट लैब का नेटवर्क तैयार किया है। इस नेटवर्क के जरिए इंसानों के साथ-साथ पशुओं और वन्यजीवों में होने वाली असामान्य बीमारियों पर भी नजर रखने की व्यवस्था की जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसी नए वायरस या खतरनाक संक्रमण के बड़े पैमाने पर फैलने से पहले उसके संभावित खतरे को समझना और समय रहते जरूरी कदम उठाना है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दुनिया में कई गंभीर संक्रमण ऐसे रहे हैं, जिनका संबंध पशुओं से रहा है। ऐसे में बीमारी के इंसानों तक पहुंचने से पहले उसके संकेतों की पहचान करना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वन हेल्थ का मतलब इंसान, पशु और पर्यावरण की सेहत को एक-दूसरे से जोड़कर देखना है। किसी नए संक्रमण की शुरुआत पशुओं या वन्यजीवों में हो सकती है और बाद में वह इंसानों तक पहुंच सकता है। इसलिए अब बीमारी की निगरानी केवल अस्पतालों और मरीजों तक सीमित रखने के बजाय इन सभी क्षेत्रों को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी इलाके में पशुओं में अचानक कोई असामान्य बीमारी बढ़ती है और उसी दौरान इंसानों में भी मिलते-जुलते लक्षण सामने आते हैं, तो दोनों घटनाओं को अलग-अलग देखने के बजाय उनके बीच संभावित संबंध की जांच की जा सकेगी। यहीं पर हाई-कंटेनमेंट लैब का नेटवर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। संदिग्ध नमूनों की जांच के जरिए यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि बीमारी किस रोगजनक से जुड़ी है और उसमें इंसानों तक पहुंचने की क्षमता है या नहीं। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, देश में 22 बीएसएल-3/4 लैब का भौगोलिक रूप से वितरित नेटवर्क मौजूद है। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल मानव, पशु और वन्यजीवों से जुड़े संदिग्ध प्रकोपों के नमूनों की जांच के लिए किया जा सकता है। इसके साथ ही सरकार इंटरऑपरेबल वन हेल्थ डैशबोर्ड विकसित करने पर भी काम कर रही है। इस डैशबोर्ड पर इंसान, पशु और पर्यावरण से जुड़ी बीमारियों के आंकड़ों को एक साथ देखा जा सकेगा। इससे अलग-अलग विभागों में मौजूद सूचनाओं को जोड़कर बीमारी के संभावित बढ़ते खतरे के संकेतों को पहले पहचानने में मदद मिलने की उम्मीद है। इस पूरी व्यवस्था का मकसद यही है कि किसी नए संक्रमण के बड़े प्रकोप में बदलने से पहले ही उसके संकेतों को पहचान लिया जाए और समय रहते कार्रवाई शुरू की जा सके।
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