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उत्तर प्रदेश: ईमानदारों की सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल

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उत्तर प्रदेश  Published by: Faisal , Date: 13/02/2026 03:57:49 pm Share:
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  • 13/02/2026 03:57:49 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: सरसावा कस्बे में विकास कार्यों के नाम पर जो कुछ हो रहा है, वह अब सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार की तस्वीर पेश कर रहा है। अंबाला रोड पर सेंट मेरी गेट के सामने बार-बार गिरता निर्माणाधीन नाला इस बात का सबूत है कि कस्बे में निर्माण कार्य

विस्तार

उत्तर प्रदेश: सरसावा कस्बे में विकास कार्यों के नाम पर जो कुछ हो रहा है, वह अब सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार की तस्वीर पेश कर रहा है। अंबाला रोड पर सेंट मेरी गेट के सामने बार-बार गिरता निर्माणाधीन नाला इस बात का सबूत है कि कस्बे में निर्माण कार्य गुणवत्ता नहीं, कमीशन के हिसाब से कराए जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह सब उस सरकार के कार्यकाल में हो रहा है जो खुद को ईमानदारों की सरकार कहती है। तो फिर सवाल उठता है, ईमानदारों की सरकार इस भ्रष्टाचार पर खामोश क्यों है? क्या ज़मीनी हकीकत देखने वाला कोई नहीं बचा? स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज है कि दूसरे दलों से भाजपा में शामिल हुए कुछ नेताओं और उनसे जुड़े ठेकेदारों को मानो भ्रष्टाचार का लाइसेंस मिल गया हो। आरोप यह भी हैं कि बार-बार नाला गिरने के बावजूद न तो ठेकेदार बदला गया, न ही किसी अधिकारी पर कार्रवाई हुई। क्या भाजपा की सदस्यता लेते ही नेताओं की जवाबदेही खत्म हो जाती है?

जनता पूछ रही है ! जब नाला कई बार गिर चुका है, तो भुगतान किस आधार पर हो रहा है?  गुणवत्ता जांच की रिपोर्ट कहां है?  जिम्मेदार अधिकारियों और कमीशन लेकर ठेका देने वाले प्रिय नेताओं पर सत्ताधारी पार्टी चुप्पी क्यों साधे है ?  उधर अधूरी सड़क, उड़ती धूल, बिखरी बजरी और बढ़ता हादसों का खतरा आम जनता के लिए रोज़ की परेशानी बन चुका है। स्कूल जाने वाले बच्चे, दुकानदार और राहगीर सब परेशान हैं, लेकिन कार्रवाई कहीं नजर नहीं आ रही। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भ्रष्टाचार अब इतना मजबूत हो गया है कि उस पर सत्ता की चुप्पी का कवच चढ़ गया है? या फिर कस्बे की जनता की परेशानी  अब किसी एजेंडे में शामिल ही नहीं रही?
सरसावा की जनता अब सिर्फ नाला नहीं, जवाब चाहती है। क्योंकि अगर आज नाला गिर रहा है, तो कल भरोसा भी धराशाई हो जाएगा। सत्ताएं भ्रष्टों को शामिल करके रोज रोज नहीं आएगी। जनता चुप जरूर है गूंगी भी है आंधी और अनपढ़ नहीं।