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उत्तर प्रदेश: बहगुल नदी का तेज कटान, सैकड़ों बीघा जमीन नदी में समाई; सुल्तानपुर गांव पर मंडराया खतरा
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: मीरगंज तहसील क्षेत्र में बहगुल नदी का तेज कटान अब ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन गया है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: मीरगंज तहसील क्षेत्र में बहगुल नदी का तेज कटान अब ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन गया है। सुल्तानपुर और बसई गांव के आसपास नदी तेजी से जमीन काट रही है। लगातार हो रहे कटान की वजह से ग्रामीणों की सैकड़ों बीघा खेती की जमीन और खड़ी फसलें नदी में समा चुकी हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि अगर समय रहते कटान पर रोक नहीं लगी तो नदी गांव की आबादी तक पहुंच सकती है। ग्रामीणों के मुताबिक, बहगुल नदी बसई गांव की तरफ से सुल्तानपुर की ओर तेजी से कटान कर रही है। नदी का दायरा लगातार बढ़ने से किसानों की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। कई किसानों की जमीन कटान की भेंट चढ़ चुकी है और खेतों में खड़ी फसलें भी बर्बाद हो गई हैं। 2011 में नदी में समा गए थे 75 घर ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2011 में भी बहगुल नदी ने सुल्तानपुर गांव में भारी तबाही मचाई थी। उस दौरान नदी के कटान में करीब 75 घर बह गए थे। कई परिवारों को अपना घर छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा था। अब कई साल बाद दोबारा तेज कटान शुरू होने से ग्रामीणों को पुराने हालात की चिंता सताने लगी है। ग्रामीण ओमेंद्र सिंह, महेश सिंह, सुंदर लाल, देवदत्त, दुर्जन लाल, मुरारी सिंह, मोहनलाल और बेचेलाल का कहना है कि नदी लगातार खेतों की ओर बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि कटान की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो आने वाले दिनों में गांव की आबादी भी इसकी चपेट में आ सकती है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से नदी किनारे तत्काल सुरक्षा कार्य कराने की मांग की है। उनका कहना है कि नदी के किनारे पत्थरों की पिचिंग और अन्य जरूरी सुरक्षा उपाय कराए जाएं, जिससे कटान को रोका जा सके और गांव की आबादी को संभावित खतरे से बचाया जा सके। वहीं एसडीएम मीरगंज निधि शुक्ला ने बताया कि प्रशासन बहगुल नदी के जलस्तर और कटान की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। संबंधित विभाग के अधिकारियों और राजस्व टीम से स्थिति की जानकारी ली जा रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्या के समाधान के लिए नियमानुसार जरूरी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल नदी के लगातार कटान से ग्रामीणों में चिंता बढ़ी हुई है। लोगों की मांग है कि आबादी तक पानी और कटान पहुंचने से पहले प्रशासन प्रभावी कदम उठाए।
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