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उत्तर प्रदेश: बरेली में 16 साल बाद रिकॉर्ड बारिश, जल निकासी व्यवस्था की खुली पोल; कई इलाके जलमग्न
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: रविवार को बरेली में हुई झमाझम बारिश ने जहां करीब 16 साल बाद भारी बारिश का रिकॉर्ड तोड़ दिया, वहीं शहर की जल निकासी व्यवस्था की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: रविवार को बरेली में हुई झमाझम बारिश ने जहां करीब 16 साल बाद भारी बारिश का रिकॉर्ड तोड़ दिया, वहीं शहर की जल निकासी व्यवस्था की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए। लगातार हुई मूसलाधार बारिश के बाद शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। सड़कें और गलियां पानी में डूब गईं, जबकि कई जगह दोपहिया और चार पहिया वाहन पानी में फंस गए। बारिश के कारण लोगों का सामान्य आवागमन भी प्रभावित रहा। मलूकपुर में तेज बहाव में बहने लगे दो बच्चे मलूकपुर क्षेत्र में जलभराव के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पानी के तेज बहाव में दो बच्चे बहने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान जल निकासी पर्याप्त नहीं होने के कारण गलियों में पानी का बहाव तेज हो जाता है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बढ़ जाता है। सुभाषनगर पुलिया पर घुटनों तक पानी सुभाषनगर पुलिया पर बारिश का पानी घुटनों तक भर गया। इससे राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी हुई। कई दोपहिया वाहन पानी में बंद हो गए और लोगों को उन्हें बाहर निकालने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। कुछ समय तक यहां आवागमन भी प्रभावित रहा। आरपीएफ कॉलोनी निवासी सुभाष चंद्र ने बताया कि बारिश होते ही क्षेत्र में जलभराव की समस्या सामने आ जाती है। उनका कहना है कि कई वर्षों से समस्या बनी हुई है, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों ने नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था की प्रभावी समीक्षा की मांग की है। ट्रैक्टर से अधिकारियों ने लिया जायजा जलभराव की सूचना के बाद अधिकारियों और नगर निगम की टीमें प्रभावित इलाकों में पहुंचीं। कुछ स्थानों पर पानी इतना अधिक था कि अधिकारियों को ट्रैक्टर पर सवार होकर निरीक्षण करना पड़ा। जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए पंपिंग और अन्य संसाधनों को सक्रिय किया गया। 213 नालों की सफाई पर करीब 5 करोड़ खर्च, फिर भी जलभराव भारी बारिश के बाद नगर निगम की नाला सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार बारिश से पहले शहर के 213 नालों की सफाई के लिए करीब पांच करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था और विभाग की ओर से नालों की 100 प्रतिशत सफाई पूरी होने का दावा किया गया था। इसके बावजूद तेज बारिश के बाद कई प्रमुख और निचले इलाकों में जलभराव हो गया। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि नालों की सफाई पूरी तरह हो चुकी थी तो इतनी बारिश के बाद पानी की निकासी व्यवस्था क्यों चरमरा गई। हालांकि बारिश की तीव्रता असाधारण बताई जा रही है, ऐसे में जलभराव को केवल नाला सफाई से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। फिर भी हर साल प्रभावित होने वाले इलाकों में स्थायी जल निकासी व्यवस्था की जरूरत एक बार फिर सामने आई है। स्थायी समाधान की उठी मांग स्थानीय लोगों ने जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों को चिह्नित कर वहां स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की मांग की है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाले जलभराव से घरों, दुकानों और यातायात पर असर पड़ता है। अब निगाह इस बात पर है कि 16 साल बाद हुई इस रिकॉर्ड बारिश के बाद नगर निगम प्रभावित क्षेत्रों की समीक्षा कर जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाता है।
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