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उत्तर प्रदेश: सूरजपुर इंडस्ट्रियल एरिया से लगे गांवों में जलभराव और गंदगी से लोग परेशान, सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: सूरजपुर इंडस्ट्रियल एरिया से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकारी स्तर पर सफाई व्यवस्था के नाम पर कार्य कराए जाने और धन खर्च किए जाने
विस्तार
उत्तर प्रदेश: सूरजपुर इंडस्ट्रियल एरिया से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकारी स्तर पर सफाई व्यवस्था के नाम पर कार्य कराए जाने और धन खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं। गांवों की गलियों, रास्तों और नालियों के आसपास गंदगी जमा है तथा कई स्थानों पर बारिश का पानी लंबे समय से भरा हुआ है। जलभराव के कारण ग्रामीणों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण गंदा पानी रास्तों और आबादी के आसपास जमा है। इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और डेंगू, मलेरिया तथा अन्य जलजनित एवं संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है। सबसे गंभीर बात यह है कि समस्या दिखाई देने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा प्रभावी और स्थायी कार्रवाई नहीं की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई के नाम पर समय-समय पर कर्मचारियों और मशीनों को भेजे जाने की बात कही जाती है, लेकिन मौके पर न तो नालियों की नियमित सफाई दिखाई देती है और न ही निकाली गई सिल्ट एवं कूड़े का उचित निस्तारण होता है। कई जगह नालियां गाद और कचरे से भरी पड़ी हैं, जिसके कारण पानी की निकासी पूरी तरह प्रभावित है। बारिश होते ही यही पानी सड़कों और आबादी में फैल जाता है। यह स्थिति केवल सफाई व्यवस्था की लापरवाही नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य और सरकारी धन के उपयोग से जुड़ा गंभीर मामला है। यदि सरकारी धन खर्च करके सफाई कार्य दिखाया जा रहा है, तो संबंधित अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर मौके पर उसका परिणाम क्यों दिखाई नहीं दे रहा है। यदि कार्य किसी ठेकेदार या एजेंसी के माध्यम से कराया जा रहा है तो उसके कार्य की गुणवत्ता, उपस्थिति, भुगतान, माप पुस्तिका और निरीक्षण रिपोर्ट की भी जांच की जानी चाहिए। संबंधित अधिकारियों से मांग है कि सूरजपुर इंडस्ट्रियल एरिया से लगे गांवों का तत्काल संयुक्त स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। निरीक्षण केवल कार्यालय में बैठकर रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित न रहे, बल्कि अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर जलभराव, नालियों, सफाई व्यवस्था, कूड़े के ढेर और पानी निकासी की वास्तविक स्थिति की वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी कराई जाए। इसके साथ ही जिन स्थानों पर पानी भरा हुआ है, वहां तत्काल पंप लगाकर पानी की निकासी कराई जाए। नालियों से पूरी सिल्ट निकाली जाए, कूड़े एवं गंदगी का तत्काल उठान कराया जाए और निकाली गई सिल्ट को रास्तों के किनारे छोड़ने के बजाय निर्धारित स्थान पर ले जाकर निस्तारित किया जाए। मच्छरों की बढ़ती समस्या को देखते हुए तत्काल फॉगिंग, एंटी-लार्वा दवा का छिड़काव और आवश्यक स्वास्थ्य विभागीय कार्रवाई भी कराई जानी चाहिए। यदि किसी स्थान पर बार-बार जलभराव हो रहा है तो केवल पानी निकालना पर्याप्त नहीं होगा। वहां स्थायी जल निकासी की व्यवस्था विकसित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। सफाई व्यवस्था में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी, कर्मचारी और ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। सरकारी धन से कराए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता और वास्तविक खर्च की जांच कराई जाए तथा यदि कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान किया गया है लेकिन मौके पर कार्य नहीं हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी शहर के नागरिकों के समान स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में रहने का अधिकार है। इंडस्ट्रियल एरिया के आसपास स्थित गांवों में लगातार गंदगी और जलभराव की स्थिति बनी रहना संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। मौके पर वास्तविक कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए। संबंधित विभाग तत्काल कार्ययोजना बनाकर जलभराव और सफाई की समस्या का समाधान करे तथा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
यदि तत्काल प्रभाव से कार्रवाई नहीं की गई तो इस पूरे मामले को उच्च अधिकारियों, जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण विभाग एवं संबंधित सक्षम प्राधिकरण के समक्ष लिखित साक्ष्यों, फोटो और वीडियो के साथ उठाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर सरकारी धन के उपयोग, सफाई कार्यों के भुगतान और मौके पर किए गए कार्यों की जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के माध्यम से भी मांगी जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सफाई के नाम पर कितना धन खर्च हुआ और उसका वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक क्यों नहीं पहुंचा।
मांग स्पष्ट है—सफाई के नाम पर खानापूर्ति बंद हो, जलभराव तत्काल खत्म हो, नालियों की पूर्ण सफाई हो और सरकारी धन से कराए जा रहे प्रत्येक कार्य की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
