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उत्तर प्रदेश: लापरवाही पर एसपी की कार्रवाई, थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मी हुए निलंबित

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उत्तर प्रदेश  Published by: Irshad Ahmad , उत्तर प्रदेश  Edited By: Yashoda, Date: 16/09/2026 01:58:11 pm Share:
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  • Published by.: Irshad Ahmad ,
  • Edited By.: Yashoda,
  • Date:
  • 16/09/2026 01:58:11 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: संतकबीरनगर पदीय दायित्वों और कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता के आरोप में पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने बखिरा थाने के थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: संतकबीरनगर पदीय दायित्वों और कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता के आरोप में पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने बखिरा थाने के थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित पुलिसकर्मियों में थानाध्यक्ष उपनिरीक्षक उमाशंकर तिवारी, उपनिरीक्षक सुरेश यादव और मुख्य आरक्षी कोमल प्रसाद शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, तीनों पुलिसकर्मियों पर अलग-अलग जिम्मेदारियों के निर्वहन में अपेक्षित रुचि नहीं लेने और विभागीय निर्देशों के अनुपालन में लापरवाही बरतने के आरोप हैं। निलंबन अवधि में तीनों को पुलिस लाइन संतकबीरनगर से संबद्ध किया गया है। सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना उन्हें मुख्यालय नहीं छोड़ने का निर्देश दिया गया है।

 थानाध्यक्ष पर महिला अपराधों में त्वरित कार्रवाई न करने का आरोप

पुलिस के निलंबन आदेश के अनुसार, थानाध्यक्ष उमाशंकर तिवारी पर महिला संबंधी अपराधों में तत्परता और संवेदनशीलता के साथ त्वरित विधिक कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा उच्चाधिकारियों की ओर से समय-समय पर चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों और दिए गए निर्देशों के अनुपालन में अपेक्षित रुचि नहीं लेने की बात कही गई है। आदेश में एचएस सत्यापन, 60 और 90 दिन की विवेचनाओं के निस्तारण, अपराध नियंत्रण के लिए प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई, गुमशुदा व्यक्तियों की तलाश, यक्ष एप पर आपराधिक सत्यापन और साइबर अपराध की रोकथाम के लिए जागरूकता कार्यक्रमों में अपेक्षित रुचि नहीं लेने का भी उल्लेख है।

महिला संबंधी अपराधों की रोकथाम के लिए मिशन शक्ति केंद्र के तहत एसओपी के अनुसार आयोजित किए जाने वाले बहू-बेटी सम्मेलन समेत विभिन्न कार्यक्रमों में भी अपेक्षित रुचि नहीं लेने का आरोप लगाया गया है।

 दरोगा और मुख्य आरक्षी पर भी कई आरोप

उपनिरीक्षक सुरेश यादव और मुख्य आरक्षी कोमल प्रसाद पर जनसुनवाई, महिला संबंधी अपराधों में कार्रवाई, निरोधात्मक कार्रवाई और बीट प्रणाली में अपेक्षित रुचि नहीं लेने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस के अनुसार, उच्चाधिकारियों की ओर से चलाए जा रहे अभियानों में भी अपेक्षित रुचि नहीं ली गई। दोनों पर जनता के साथ अमर्यादित व्यवहार करने तथा अपने पदीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता बरतने का आरोप भी निलंबन आदेश में दर्ज है।

इसके अलावा अपने क्षेत्र में होने वाली छोटी-बड़ी घटनाओं, विवादों अथवा कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली सूचनाओं को समय से उच्चाधिकारियों और संबंधित थाने को उपलब्ध नहीं कराने की बात भी कही गई है।

 पुलिस लाइन से संबद्ध रहेंगे तीनों

पुलिस के अनुसार, तीनों पुलिसकर्मियों को उत्तर प्रदेश अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की (दंड एवं अपील) नियमावली, 1991 के नियम-17(1)(क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में तीनों पुलिस लाइन संतकबीरनगर से संबद्ध रहेंगे और सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।

 लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने स्पष्ट किया है कि अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने-अपने क्षेत्र में अपराधियों की निगरानी, बीट व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने और संवेदनशील घटनाओं की रोकथाम के लिए जिम्मेदारी एवं सतर्कता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं। एसपी ने कहा है कि कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मी के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।