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उत्तर प्रदेश: लाखों की लागत से बना खेल मैदान झाड़ियों में तब्दील, बच्चों को नहीं मिल रहा लाभ
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: विकासखंड सेमरियावां के छपिया-छितौना गांव में लाखों रुपये की लागत से तैयार कराया गया खेल मैदान इन दिनों बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। मैदान में घास-फूस और झाड़ियां इतनी अधिक बढ़ गई हैं
विस्तार
उत्तर प्रदेश: विकासखंड सेमरियावां के छपिया-छितौना गांव में लाखों रुपये की लागत से तैयार कराया गया खेल मैदान इन दिनों बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। मैदान में घास-फूस और झाड़ियां इतनी अधिक बढ़ गई हैं कि दूर से यह खेल मैदान कम और जंगल अधिक नजर आता है। नियमित साफ-सफाई और देखरेख के अभाव में सरकारी धन से तैयार कराई गई खेल सुविधा का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है गांव के बच्चों और युवाओं को खेलकूद के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खेल मैदान तैयार कराया गया था। मैदान बनने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि यहां बच्चे और युवा क्रिकेट, फुटबाल, दौड़ समेत विभिन्न खेलों का अभ्यास कर सकेंगे। इससे गांव में खेल गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ ही युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर भी मिलेगा। मैदान में पहुंचना भी हो रहा मुश्किल मौजूदा समय में मैदान के अधिकांश हिस्से में घास-फूस और झाड़ियां उग आई हैं। लंबे समय से सफाई नहीं होने के कारण मैदान की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। झाड़ियों के कारण मैदान का खुला स्वरूप भी प्रभावित हो गया है। ऐसे में बच्चों और युवाओं के लिए यहां नियमित खेल गतिविधियां संचालित करना मुश्किल हो गया है। रखरखाव नहीं तो योजना का उद्देश्य अधूरा सरकारी धन खर्च कर तैयार कराई गई खेल सुविधाओं का वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है, जब उनके रखरखाव पर भी नियमित ध्यान दिया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि मैदान की सफाई और झाड़ियों की कटाई कराकर इसे दोबारा उपयोग योग्य बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही नियमित देखरेख की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि कुछ समय बाद मैदान दोबारा इसी स्थिति में न पहुंच जाए। ग्रामीणों ने सफाई और देखरेख की मांग की ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर खेल मैदान की तत्काल साफ-सफाई कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मैदान को व्यवस्थित कर दिया जाए तो गांव के बच्चों और युवाओं को खेलकूद के लिए बेहतर स्थान मिल सकता है। ग्रामीणों ने मैदान के नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की है, जिससे सरकारी धन से तैयार कराई गई इस सुविधा का उद्देश्य पूरा हो सके।
