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उत्तराखंड: प्रेमनगर में जलभराव से लोग बेहाल, स्थायी समाधान की मांग

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उत्तराखंड  Published by: Rudra Bahadur , उत्तराखंड  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 08/10/2026 11:18:07 am Share:
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  • Published by.: Rudra Bahadur ,
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  • 08/10/2026 11:18:07 am
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संक्षेप

उत्तराखंड: हर साल मानसून की शुरुआत के साथ ही प्रेमनगर क्षेत्र में जलभराव की वही पुरानी और भयावह तस्वीर दोबारा उभर आती है। हल्की सी बारिश में भी यहाँ की नालियाँ उफनने लगती हैं, सड़कों पर जलजमाव हो जाता है

विस्तार

उत्तराखंड: हर साल मानसून की शुरुआत के साथ ही प्रेमनगर क्षेत्र में जलभराव की वही पुरानी और भयावह तस्वीर दोबारा उभर आती है। हल्की सी बारिश में भी यहाँ की नालियाँ उफनने लगती हैं, सड़कों पर जलजमाव हो जाता है और देखते ही देखते गंदा पानी लोगों के ड्राइंग रूम और रसोई तक पहुँच जाता है। सालों से बनी इस समस्या का आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी रोष व्याप्त है।
आरोप-प्रत्यारोप का खेल, जिम्मेदारी से बचते नुमाइंदे जब इस समस्या को लेकर आम जनता से बात की गई, तो उन्होंने सीधे तौर पर छावनी परिषद (कैंट बोर्ड) की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया। जनता का आरोप है कि मानसून से पहले नालियों और नालों की तली झाड़ सफाई नहीं की जाती, जिससे पहली ही बारिश में निकासी ठप हो जाती है। वहीं दूसरी ओर, जब कैंट बोर्ड के कर्मचारियों व प्रशासन से सवाल पूछा जाता है, तो वे पल्ला झाड़ते हुए इसका ठीकरा स्थानीय जनता के सिर फोड़ देते हैं। कैंट बोर्ड का तर्क है कि लोग नालियों में प्लास्टिक, कचरा और निर्माण सामग्री फेंक देते हैं, जिससे पानी का बहाव रुक जाता है।


बड़े नेताओं के दावों के बीच ‘जस के तस’ हालात प्रेमनगर का दुर्भाग्य यह भी है कि यहाँ से कई बड़े राजनीतिक दलों के दिग्गज नेताओं का सीधा वास्ता और आना-जाना है। चुनाव के समय जलभराव से मुक्ति और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही ये दावे कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे हर मानसून में भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव झेलने को मजबूर हैं। सवाल यह उठता है कि क्या छावनी परिषद और स्थानीय प्रतिनिधि मिलकर इस समस्या का कोई स्थायी ब्लूप्रिंट तैयार करेंगे या हर साल की तरह इस बार भी जनता को आरोप-प्रत्यारोप के इस खेल में पिसने के लिए छोड़ दिया जाएगा?

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