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मध्य प्रदेश: फ्रांस के प्रोफेसर ने कालीबंगा में 5,000 साल पुरानी हड़प्पा सभ्यता का इतिहास समझाया
- Photo by : SOCIAL MEDIA
संक्षेप
मध्य प्रदेश: हनुमानगढ़ जिले के कालीबंगा में आज फ्रांस से आए प्रोफेसर *सर्ज ले गुइरिएक (Serge Le Guirriec)* ने अपने ग्रुप के साथ प्राचीन पुरातात्विक स्थल का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रुप के सदस्यों को भारत की प्राचीन सभ्यता, सिं
विस्तार
मध्य प्रदेश: हनुमानगढ़ जिले के कालीबंगा में आज फ्रांस से आए प्रोफेसर *सर्ज ले गुइरिएक (Serge Le Guirriec)* ने अपने ग्रुप के साथ प्राचीन पुरातात्विक स्थल का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रुप के सदस्यों को भारत की प्राचीन सभ्यता, सिंधु घाटी सभ्यता, मोहनजोदड़ो और हड़प्पा संस्कृति के इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कालीबंगा के ऐतिहासिक महत्व को समझाते हुए प्राचीन सभ्यता के अवशेषों का अवलोकन भी करवाया। कालीबंगा: प्राचीन हड़प्पा सभ्यता का महत्वपूर्ण केंद्र कालीबंगा राजस्थान के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में शामिल है। इसका नाम स्थानीय रूप से मिले काले रंग की चूड़ियों के अवशेषों से जुड़ा माना जाता है। यह स्थल लगभग 5,000 वर्ष पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता के इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पुरातात्विक उत्खनन में यहां हड़प्पा-पूर्व और विकसित हड़प्पा काल, दोनों के प्रमाण मिले हैं। यहां प्राचीन बस्ती की संरचनाएं, किलेबंदी, मकानों के अवशेष, मिट्टी के बर्तन, मुहरें और अन्य पुरावशेष मिले हैं। कालीबंगा की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में प्राचीन खेत में हल से जुताई के निशान भी शामिल हैं, जो उस समय की कृषि व्यवस्था की जानकारी देते हैं। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा संस्कृति पर चर्चा प्रोफेसर सर्ज ले गुइरिएक ने अपने ग्रुप को मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसी प्राचीन नगरीय सभ्यताओं के इतिहास से परिचित कराया। इन सभ्यताओं में नगर नियोजन, जल निकासी, कृषि, शिल्पकला और व्यापार का महत्वपूर्ण स्थान था। कालीबंगा के पुरातात्विक अवशेष भी बताते हैं कि प्राचीन भारत में व्यवस्थित बस्तियों और विकसित जीवनशैली का अस्तित्व था। सरस्वती नदी के लुप्त होने के इतिहास पर जानकारी इस ऐतिहासिक भ्रमण के दौरान प्राचीन सरस्वती नदी के संभावित मार्ग और उसके लुप्त होने से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। कालीबंगा घग्घर नदी के प्राचीन प्रवाह क्षेत्र के पास स्थित है, जिसे कई विद्वान प्राचीन सरस्वती नदी से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, नदी की वास्तविक प्राचीन धारा, उसके मार्ग और उसके सूखने के कारणों को लेकर वैज्ञानिक एवं ऐतिहासिक शोध जारी है। संग्रहालय में देखीं प्राचीन धरोहरें भ्रमण के दौरान ग्रुप ने कालीबंगा के पुरातात्विक संग्रहालय का भी दौरा किया। संग्रहालय में प्राचीन सभ्यता से संबंधित मिट्टी के बर्तन, टेराकोटा की वस्तुएं, पत्थर और धातु से बने सामान, ईंटें तथा अन्य उत्खनित पुरावशेष प्रदर्शित हैं। इन वस्तुओं के माध्यम से प्राचीन लोगों की जीवनशैली, कला, तकनीक और सामाजिक व्यवस्था को समझने का अवसर मिलता ह हल्दीघाटी सहित भारत के इतिहास पर भी चर्चा प्रोफेसर ने अपने ग्रुप के साथ हल्दीघाटी सहित भारत के अन्य ऐतिहासिक स्थलों और उनसे जुड़े इतिहास पर भी जानकारी साझा की। इस यात्रा का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन सभ्यताओं और ऐतिहासिक धरोहरों को करीब से जानना तथा उनके महत्व को समझना रहा।
कालीबंगा का यह भ्रमण भारत और फ्रांस के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा। ऐसे भ्रमण विदेशी अतिथियों को भारत की प्राचीन विरासत से परिचित कराने और इतिहास के प्रति रुचि बढ़ाने में सहायक होते हैं।
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