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उत्तर प्रदेश: विधायक के बेटों को जन्मदिन की बधाई पर सरकारी शिक्षक की पोस्ट से उठे सवाल

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उत्तर प्रदेश  Published by: Arvind Kumar , उत्तर प्रदेश  Edited By: Yashoda, Date: 28/09/2026 05:47:05 pm Share:
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  • Published by.: Arvind Kumar ,
  • Edited By.: Yashoda,
  • Date:
  • 28/09/2026 05:47:05 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: फिरोजाबाद सिरसागंज विकासखंड मदनपुर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय नगला जोर से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें सरकारी शिक्षक की ओर से विधायक के बेटे भैया प्रताप और छोटू को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: फिरोजाबाद सिरसागंज विकासखंड मदनपुर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय नगला जोर से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें सरकारी शिक्षक की ओर से विधायक के बेटे भैया प्रताप और छोटू को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि सरकारी सेवा में कार्यरत शिक्षक द्वारा किसी राजनीतिक परिवार से जुड़े व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से जन्मदिन की शुभकामनाएं देना क्या उचित है और क्या सरकारी शिक्षक इस तरह के सार्वजनिक संदेश दे सकते हैं।

बताया जा रहा है कि प्राथमिक विद्यालय नगला जोर, विकासखंड मदनपुर, जिला फिरोजाबाद से संबंधित एक सरकारी शिक्षक की फोटो/पोस्ट सोशल मीडिया पर सामने आई है। इसमें विधायक के बेटे भैया प्रताप और छोटू को जन्मदिन की शुभकामनाएं दिए जाने की बात कही जा रही है। इस पोस्ट के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में तैनात शिक्षक का मुख्य दायित्व बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना है। ऐसे में यदि कोई सरकारी शिक्षक किसी राजनीतिक व्यक्ति या राजनीतिक परिवार से जुड़े व्यक्ति के पक्ष में सार्वजनिक रूप से शुभकामना संदेश देता है, तो उसकी भूमिका को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, संबंधित पोस्ट किस परिस्थिति में और किस उद्देश्य से की गई, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया जाना अभी बाकी है।

मामले में संजीव कुमार उर्फ संजू, पिता का नाम राजेश कुमार, तथा प्रधान प्रतिनिधि कमलेश देवी, पति का नाम राजेश कुमार, का नाम भी स्थानीय स्तर पर चर्चा में बताया जा रहा है। हालांकि, इन व्यक्तियों की भूमिका और पोस्ट से उनका वास्तविक संबंध क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग या प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की मांग है कि यदि सरकारी शिक्षक द्वारा ऐसी पोस्ट की गई है तो शिक्षा विभाग को मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। जांच के दौरान यह देखा जाए कि पोस्ट वास्तव में किसके द्वारा की गई, उसका उद्देश्य क्या था और क्या सरकारी कर्मचारी की सेवा नियमावली के तहत ऐसी सार्वजनिक गतिविधि की अनुमति है।

लोगों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों से निष्पक्ष और जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा रहती है। इसलिए किसी भी शिकायत पर बिना तथ्य जांचे निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित विभाग को सोशल मीडिया पोस्ट, शिक्षक की भूमिका और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए।

फिलहाल मामले में विभागीय स्तर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि शिकायत दर्ज होती है तो शिक्षा विभाग द्वारा जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित शिक्षक ने वास्तव में क्या पोस्ट किया था और उस पर किसी प्रकार की विभागीय कार्रवाई बनती है या नहीं।