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बिहार: भोजपुर एनकाउंटर विवाद समाजसेवी भरत तिवारी की मौत पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज
- Photo by : social media
संक्षेप
बिहार: बिहार के भोजपुर में एक समाजसेवी युवा की मौत पर उठ रहे गंभीर सवाल बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गाँव में 17 जून 2026 को हुए पुलिस एनकाउंटर में 30 साल भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई, जिसके बाद से पूरा इलाका आक्रोश से भरा है।
विस्तार
बिहार: बिहार के भोजपुर में एक समाजसेवी युवा की मौत पर उठ रहे गंभीर सवाल बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गाँव में 17 जून 2026 को हुए पुलिस एनकाउंटर में 30 साल भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई, जिसके बाद से पूरा इलाका आक्रोश से भरा है। भरत तिवारी कोई अपराधी नहीं था, बल्कि एक समाजसेवी युवा था जो पिछले 5-6 सालों से अपने गाँव के बाढ़ और गंगा कटाव से प्रभावित लोगों के हक के लिए आवाज उठा रहा था। वह B.Sc. का अंतिम वर्ष का छात्र था और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था, उसके पूरे परिवार का दावा है कि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और कोई FIR भी दर्ज नहीं थी। पुलिस का दावा है कि भरत ने Facebook Live के दौरान पिस्तौल लहराई और पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। हालाँकि, परिवार और ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि भरत ने सरेंडर कर चुका था — वह Facebook Live के दौरान पिस्तौल पुलिस के सामने फेंक दी और आत्मसमर्पण कर दिया, फिर भी पुलिस ने 4-5 गोलियां मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद 1000 से अधिक ग्रामीण आरा-बक्सर फोरलेन हाईवे जाम कर दिया, शव सड़क पर रखकर न्याय की मांग की, जिस पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। विवाद इतना गहरा गया कि 4-5 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया और बिहार के मुख्यमंत्री समरत चौधरी ने स्वयं इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए न्यायिक प्रोब का आदेश दिया। आम लोग पूछ रहे हैं कि क्या बिहार में अब बिना जांच के फर्जी एनकाउंटर हो रहे हैं और क्या यह 'योगी मॉडल' का नया रूप है। भरत तिवारी की मौत ने बिहार की पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और इस मामले की जांच अब आगे चल रही है।
