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दिल्ली: ₹70 हजार मासिक भरण-पोषण की मांग खारिज, स्कूल फीस का देना होगा 50%
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संक्षेप
दिल्ली: दिल्ली की पश्चिम जिला स्थित महिला अदालत ने 3 नवंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए याचिकाकर्ता महिला की ओर से मांगे गए 70 हजार रुपये प्रतिमाह के अंतरिम भरण-पोषण (Interim Maintenance) के आवेदन को खारिज कर दिया।
विस्तार
दिल्ली: दिल्ली की पश्चिम जिला स्थित महिला अदालत ने 3 नवंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए याचिकाकर्ता महिला की ओर से मांगे गए 70 हजार रुपये प्रतिमाह के अंतरिम भरण-पोषण (Interim Maintenance) के आवेदन को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में वित्तीय जानकारी और तथ्यों का पूरा खुलासा करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल वित्तीय विवरण और याचिका में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया था, जो मामले के निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए जरूरी थे। मामले में याचिकाकर्ता ने अदालत से प्रतिमाह 70 हजार रुपये अंतरिम भरण-पोषण के रूप में दिलाए जाने की मांग की थी। हालांकि, मामले की सुनवाई और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद अदालत ने वित्तीय खुलासों में सामने आई विसंगतियों तथा महत्वपूर्ण तथ्यों के कथित छिपाव को गंभीरता से लिया। इसके आधार पर अदालत ने अंतरिम भरण-पोषण की मांग स्वीकार नहीं की और संबंधित आवेदन खारिज कर दिया। अदालत की इस टिप्पणी को वैवाहिक विवादों और भरण-पोषण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस आदेश से यह संदेश सामने आता है कि न्यायालय के समक्ष आर्थिक स्थिति से संबंधित जानकारी प्रस्तुत करते समय सभी पक्षों को अपनी आय, संपत्ति, खर्च और अन्य प्रासंगिक वित्तीय तथ्यों का सही एवं पूर्ण विवरण देना चाहिए। किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाने या अधूरी जानकारी देने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। बच्चों की शिक्षा के खर्च पर भी दिया निर्देश इस मामले में अदालत ने बच्चों की शिक्षा से जुड़े खर्च को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए। आदेश के अनुसार, स्कूल बदलने के निर्णय से संबंधित अपील का अंतिम निस्तारण होने तक प्रतिवादी को बच्चों की स्कूल फीस का 50 प्रतिशत हिस्सा वहन करना जारी रखना होगा। इस प्रकार अदालत ने एक ओर अंतरिम भरण-पोषण की मांग को खारिज किया, वहीं दूसरी ओर बच्चों की शिक्षा और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए फीस संबंधी व्यवस्था जारी रखी। अदालत का यह निर्देश स्पष्ट करता है कि पति-पत्नी के बीच चल रहे कानूनी विवाद का प्रभाव बच्चों की पढ़ाई और शैक्षणिक व्यवस्था पर नहीं पड़ना चाहिए। स्कूल परिवर्तन से संबंधित अपील पर अंतिम निर्णय आने तक मौजूदा व्यवस्था के तहत फीस का भुगतान जारी रखने का निर्देश दिया गया है। सत्य और पारदर्शिता को बताया महत्वपूर्ण कानूनी दृष्टिकोण से यह मामला भरण-पोषण की कार्यवाही में पारदर्शिता और सही वित्तीय जानकारी प्रस्तुत करने के महत्व को रेखांकित करता है। अदालत के समक्ष आर्थिक सहायता की मांग करने वाले पक्ष के लिए अपनी वास्तविक आर्थिक स्थिति का खुलासा करना आवश्यक है, ताकि न्यायालय उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय ले सके। प्रतिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता गोविंद पारीक ने इस आदेश को संपादकीय विचारार्थ साझा किया है। उनका कहना है कि इस मामले में अदालत की टिप्पणियां उन सभी मामलों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिनमें भरण-पोषण की मांग के साथ वित्तीय विवरण प्रस्तुत किए जाते हैं।
