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झारखण्ड: समय पर नहीं खुलता पिपराडीह आंगनबाड़ी केंद्र, आदिवासी बच्चों के विकास पर पड़ रहा असर
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संक्षेप
झारखण्ड: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आंगनबाड़ी केंद्रों के बंद रहने से कुपोषित बच्चों का भविष्य हो रहा है बर्बाद। बोकारो जिला के ज्यादातर सुदूर प्रान्तों के आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़े रहते हैं। सीडीपीओ और सुपरवाइजर की मिली भगत से यह सिर्फ कागजों में चल रहे हैं।
विस्तार
झारखण्ड: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आंगनबाड़ी केंद्रों के बंद रहने से कुपोषित बच्चों का भविष्य हो रहा है बर्बाद। बोकारो जिला के ज्यादातर सुदूर प्रान्तों के आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़े रहते हैं। सीडीपीओ और सुपरवाइजर की मिली भगत से यह सिर्फ कागजों में चल रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्र संचालन के नाम पर हो रहा है सरकारी फंड का घोटाला। विस्तार: पेटरवार प्रखंड का पिपराडीह गांव आदिवासी बहुल गांव है यहां संथाली समुदाय के लोग ही रहते हैं यहां स्थित आंगनबाड़ी केंद्र करीब-करीब बंद ही रहता है आंगनबाड़ी केंद्र संख्या का कोड62(110)है। इस केंद्र की सेविका पार्वती देवी और सेविका पियासो देवी है। सेविका और सहायिका को जब समय मिलता है तब आंगनबाड़ी मनमर्जी खोलती है। इस आंगनवाड़ी केंद्र में घोर अ नियमित्तता है ।दिनांक 10 मार्च 2026 को समय करीब 10:15 में जांच के दरम्यान आंगनबाड़ी केंद्र बंद पाया गया। मीडिया के पहुंचने की खबर सुनकर सेविका पार्वती देवी भाग कर आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची और पार्वती देवी के बुलाने पर ही सेविका पियासो देवी आधा घंटा के बाद केंद्र में पहुंची। पता करने पर गांव वालों ने बताया कि यह आंगनबाड़ी केंद्र बराबर बंद ही रहता है सेविका -सहायिका मनमानी तरीके से आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन करती है। दिनांक 13 मार्च 2026 को गोमिया प्रखंड का आंगनबाड़ी केंद्र जो पंचायत तिलैया के दनिया बाजारटांड में है वह भी समय करीब 10:00 बजे खाली पड़ा मिला। सहायिका शकुंतला देवीअपने सेंटर में मौजूद नहीं थी। मीडिया के पहुंचने की खबर सुनकर ही दौड़ी दौड़ी आई। इस आंगनवाड़ी का कोड संख्या 814 है और इसकी सेविका चंदा देवी गर्भवती महिलाओं का फेस कैप्चर करने के लिए गांव गई हुई थी। गांव वालों ने बताया सहायिका शकुंतला देवी सेविका की बात भी नहीं मानती है और मनमानी तरीके से काम करती है। गोमिया और पेटरवार प्रखंड के देहाती इलाकों के आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ कागज में ही संचालित होते हैं सीडीपीओ और सुपरवाइजर की मिली भगत से कमीशन जिला मुख्यालय तक पहुंचता है। आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के नाम पर भयंकर घोटाला हो रहा है। झारखंड सरकार के जनप्रतिनिधिगण आंगनबाड़ी केंद्रों के कूव्यवस्था पर ध्यान नहीं देते हैं। आदिवासी बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
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