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मध्य प्रदेश: पोरसा को अलग विधानसभा का दर्जा देने की मांग तेज, परिसीमन को लेकर उठी आवाज

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh Tomar , Date: 06/04/2026 11:32:38 am Share:
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  • 06/04/2026 11:32:38 am
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: विधानसभा क्षेत्र के परिसीमन को लेकर पोरसा को अलग विधानसभा का दर्जा दिए जाने की मांग अब तेज होती जा रही है।

विस्तार

मध्य प्रदेश: विधानसभा क्षेत्र के परिसीमन को लेकर पोरसा को अलग विधानसभा का दर्जा दिए जाने की मांग अब तेज होती जा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, व्यापारिक संगठनों और समाजसेवियों ने शासन से मांग की है कि नियमों के अनुसार परिसीमन कर पोरसा को पृथक विधानसभा बनाया जाए, जिससे क्षेत्र के विकास को गति मिल सके।ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर ने कहा कि वर्तमान में पोरसा, अंबाह विधानसभा क्षेत्र में शामिल है। क्षेत्रफल और मतदाता संख्या अधिक होने के कारण विधायक सभी क्षेत्रों में पर्याप्त समय नहीं दे पाते। यदि पोरसा को अलग विधानसभा बनाया जाता है, तो विधायक निधि से स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को प्राथमिकता मिल सकेगी।व्यापार संघ के अध्यक्ष महावीर जैन का कहना है कि क्षेत्र के व्यापार, आधारभूत संरचना और नगरीय सुविधाओं के विस्तार के लिए अलग विधानसभा आवश्यक है। विधायक को मिलने वाली निधि का सीधा लाभ पोरसा क्षेत्र को मिलेगा और अधूरे विकास कार्यों को गति मिलेगी।

जगदीशगढ़ के सुनील सखवार ने कहा कि वर्तमान विधायक का क्षेत्र अत्यंत विस्तृत है, जिसके कारण पोरसा क्षेत्र में जनसमस्याओं के निराकरण में देरी होती है। अलग विधानसभा बनने से क्षेत्र को अपना प्रतिनिधि मिलेगा, जिससे आमजन सीधे संवाद कर सकेंगे। समाजसेवी सुधीर कुमार गांगिल ने बताया कि नियमों के अनुसार लगभग एक लाख मतदाताओं पर एक विधानसभा का प्रावधान माना जाता है, जबकि वर्तमान में अंबाह विधानसभा में दो लाख से अधिक मतदाता हैं। इसके बावजूद अंबाह और पोरसा दोनों एक ही विधानसभा में शामिल हैं, जो जनसंख्या अनुपात के दृष्टिकोण से संतुलित नहीं है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से परिसीमन नहीं हुआ है, जबकि जनसंख्या वृद्धि के अनुसार सीटों का पुनर्निर्धारण होना चाहिए। कांग्रेस नेता आसिफ खान पठान ने भी कहा कि परिसीमन प्रत्येक 10 वर्ष में जनसंख्या के आधार पर होना चाहिए। बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ेगी तो विकास योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचेगा।

कौथर खुर्द के समाजसेवी रवि सिंह तोमर ने कहा कि पोरसा को अलग विधानसभा का दर्जा मिलने से विधायक निधि का उपयोग स्थानीय आवश्यकताओं—सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और नगरीय सुविधाओं—पर केंद्रित किया जा सकेगा, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास को गति मिलेगी। गौरतलब है कि भारत में परिसीमन की प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग के अधीन गठित परिसीमन आयोग द्वारा की जाती है, जिसका उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का संतुलित पुनर्गठन करना होता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शासन अपने निर्धारित नियमों के अनुसार समय-समय पर परिसीमन सुनिश्चित करे, तो प्रतिनिधित्व अधिक प्रभावी होगा और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी। अब देखना यह है कि शासन स्तर पर इस मांग को कितनी गंभीरता से लिया जाता है और पोरसा को अलग विधानसभा का दर्जा दिलाने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।
 


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