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ओडिशा: दासविद्याधरपुर गांव में मेरुयात्रा का भव्य आयोजन

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ओडिशा  Published by: Laxminarayan Pathi , ओडिशा  Edited By: Namita Chauhan, Date: 15/04/2026 11:55:57 am Share:
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संक्षेप

ओडिशा: सत्यवादी ब्लॉक अंतर्गत दासविद्याधरपुर गांव में 14 अप्रैल को मेरुयात्रा (झामुयात्रा) भक्ति और निष्ठा के साथ मनाई गई। पाटुआ भक्तों ने इस यात्रा को अत्यंत श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाया। इस अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य स्वयं कष्ट सहकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करना है।

विस्तार

ओडिशा: सत्यवादी ब्लॉक अंतर्गत दासविद्याधरपुर गांव में 14 अप्रैल को मेरुयात्रा (झामुयात्रा) भक्ति और निष्ठा के साथ मनाई गई। पाटुआ भक्तों ने इस यात्रा को अत्यंत श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाया। इस अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य स्वयं कष्ट सहकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करना है।

यात्रा से पहले पाटुआ भक्त धार्मिक नियमों का पालन करते हुए अपने परिवार से अलग रहते हैं। इस दौरान वे गांव की अधिष्ठात्री देवी मां विन्ध्यवासिनी की आराधना, चिंतन और कीर्तन में समय व्यतीत करते हैं।

मेरुयात्रा के दिन अपराह्न में उत्सव की शुरुआत होती है। पास स्थित श्रीनीलकंठेश्वर देव मंदिर के पोखर में पाटुआ भक्त एकत्र होते हैं। वहां उनके पीठ में रस्सी से जुड़े लोहे के हुक लगाए जाते हैं और उन्हें टी आकार की संरचना से बांधकर झुलाया जाता है। इस प्रकार झूलते हुए भक्तों को पूरे क्षेत्र में घुमाया जाता है।

देवी के प्रति गहरी आस्था के कारण भक्तों के चेहरे पर कष्ट का कोई भाव दिखाई नहीं देता। आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु इस अद्भुत और भावनात्मक दृश्य को श्रद्धा से देखते हैं। उस समय हरिध्वनि से पूरा वातावरण गूंज उठता है।

यह झामुयात्रा वर्ष में एक बार आयोजित होती है, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु उपस्थित होते हैं। भीड़ प्रबंधन से लेकर श्रद्धालुओं को दही-शरबत पिलाने तक गांव के स्वयंसेवकों का विशेष योगदान रहता है।

दासविद्याधरपुर सहित ओडिशा के कई स्थानों पर इस दिन मेरुयात्रा का आयोजन किया जाता है। साथ ही महाविषुव संक्रांति भी भक्ति और निष्ठा के साथ मनाई जाती है, जो ओडिया नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।

पुराणों के अनुसार, इस दिन सूर्य भूमध्य रेखा के मध्य में स्थित होता है। तेज गर्मी के कारण भगवान विष्णु को प्रिय तुलसी पौधे को शीतलता प्रदान करने के लिए लस्सी अर्पित की जाती है। घरों में महिलाएं छतुआ (सत्तू), केला, पनीर, आम और बेल मिलाकर लस्सी बनाती हैं और तुलसी के पौधे पर टपकने के लिए एक छोटा घड़ा रखती हैं।

इस दिन महावीर जयंती भी मनाई जाती है, जिसे भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

विशेष रूप से, हर वर्ष एक ही दिन ओडिया नववर्ष, मेरुयात्रा, महावीर जयंती और महाविषुव संक्रांति का संयोग होता है, जो इस दिन को ओडिया समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।

इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री मोहन माझी के सहयोग से दासविद्याधरपुर बड़ा पोखर के चारों ओर प्रकाश व्यवस्था का उद्घाटन सांसद डॉ. संबित पात्र और विधायक ओमप्रकाश मिश्र द्वारा नारियल फोड़कर किया गया। ग्रामवासियों ने इसके लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।


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