Contact for Advertisement 9650503773


राजस्थान: वृक्षों की रक्षा में 363 शहीदों के बलिदान को नमन, जोधपुर में आयोजित हुआ विशाल मेला

- Photo by : social media

राजस्थान  Published by: Mangi Lal , राजस्थान  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 21/09/2026 10:38:23 am Share:
  • राजस्थान
  • Published by.: Mangi Lal ,
  • Edited By.: Kunal Tewatia,
  • Date:
  • 21/09/2026 10:38:23 am
Share:

संक्षेप

राजस्थान: 26 किलोमीटर दूर खेजड़ली गांव में हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल दशमी (भादवा सुदी दशमी) को  शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। खेजड़ी वृक्ष  विश्व का एकमात्र अनूठा वृक्ष है।

विस्तार

राजस्थान: 26 किलोमीटर दूर खेजड़ली गांव में हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल दशमी (भादवा सुदी दशमी) को  शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। खेजड़ी वृक्ष  विश्व का एकमात्र अनूठा वृक्ष है। जो प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए समर्पित है । खेजड़ली में हर वर्ष 21 सितंबर 1770 को उत्सव और मेले के आयोजन किया जाता है। तत्कालीन महाराजा अभय सिंह जी के शासन काल में महलो के निर्माण हेतु लकड़ी की आवश्यकता हुई ।उन्होंने खेजड़ी के वृक्षों को काटकर लकड़ियां लाने का सैनिकों को आदेश दिया। सैनिकों ने खेजड़ी के  वृक्षों को काटना शुरू किया। इसका विरोध करते हुए बिश्नोई समाज की माता अमृता देवी विश्नोई के नेतृत्व में 363 महिलाओं पुरुषों ने हर खेजड़ी वृक्ष को पकड़ कर के खड़े हो गए ।जिन में 69 महिलाएं। 


और 294 पुरुष थे।  महाराजा के सैनिकों के मना करने पर वे अडिंग रहे।खेजड़ी पेड़ की रक्षा करने के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया ।अमृता देवी शहीदी स्थल पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है । विश्नोई समाज के स्त्री ,पुरुष अपने पारंपरिक सफेद वेशभुषा एवं औरतें पारंपरिक वेशभूषा एवं आभूषणों से सजी बड़े ही उत्साह के साथ इस मेले में आते हैं । वहां जाकर के सामूहिक हवन करते हैं ।आहुतियां दी जाती है ।पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को पुरस्कार दिया जाता है--- जिनमें गुरु जंभेश्वर पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार और अमृता देवी वृक्ष मित्र पुरस्कार देकर के सम्मानित करते हैं। हजारों की संख्या में बिश्नोई धर्म के लोग व अन्य समाज के  लोग  आते हैं। इस मेले में शामिल होते हैं।  

विश्नोई समाज के लोग खेजड़ी के वृक्ष व हिरण की रक्षा करने में तत्पर रहते हैं ।इनको अपना देवता मानते हैं ।इनकी रक्षा करना अपना परम धर्म मानते हैं । बिश्नोई समाज का एक प्रसिद्ध संदेश है---- सिर सांठे रूंख रहे ,तो भी सस्तो जाण।  इस  उत्सव और मेले मे भाग लेने के लिए हजारों लोग आकर  शहीदों को श्रद्धांजलि स्वरूप श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं ।खेजड़ी के वृक्ष के महत्व को देखते हुए राजस्थान सरकार ने खेजड़ी के वृक्ष को काटने पर प्रतिबंध लगाकर राज्य में खेजड़ी के वृक्ष को सवोच्च स्थान प्रदान किया गया है। राजस्थान में खेजड़ी के वृक्ष को काटना कानूनी अपराध माना गया है । प्रकृति प्रेमियों के इस अद्भुत बलिदान को बारम्बार नमन। पर्यावरण संरक्षण में अपने प्राणों की आहुति देने वालों की ऐसी मिसाल विश्व में दुर्लभ है।

Related News

उत्तर प्रदेश: छानबे में सपा का PDA सम्मेलन व सम्मान समारोह, बेरोजगारी और महंगाई को लेकर सरकार पर बोला हमला

उत्तर प्रदेश: 15 दिन में एकेडमिक ब्लॉक तैयार करने के आदेश, ढिलाई पर होगी निलंबन की कार्रवाई

मध्य प्रदेश: किसानों को सिंचाई के लिए दिन में मिलेगी 10 घंटे बिजली, सतना बेल्ट में भी लाया जाएगा नर्मदा का पानी

उत्तर प्रदेश: साइट 4 में 'विजय महोत्सव 2026' के लिए हुआ भूमि पूजन, 11 से 21 अक्टूबर तक होगी भव्य रामलीला

उत्तर प्रदेश: सामशेरगंज पुलिस की बड़ी सफलता, 10 हथियार व 10 कारतूस के साथ दो तस्कर गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश: बाल्मीकि समाज ने बसपा सांसद रामजी गौतम का किया अभिनंदन, सीवर पीड़ितों को 30-30 लाख मुआवजा दिलाने पर जताया आभार


Featured News