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उत्तर प्रदेश: यूपी से मानसून की विदाई शुरू, 21 सितंबर के बाद थमेगा बारिश का दौर; देश में सूखे मानसून की चिंता
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: मानसून विदा होने जा रहा है. मौसम विभाग के अनुसार 21 सितंबर के बाद कुछ जिलों में छिटपुट बारिश हो सकती है. लेकिन यह भारी मानसूनी बरसात नहीं होगी. उत्तर प्रदेश के साथ देश के कई
विस्तार
उत्तर प्रदेश: मानसून विदा होने जा रहा है. मौसम विभाग के अनुसार 21 सितंबर के बाद कुछ जिलों में छिटपुट बारिश हो सकती है. लेकिन यह भारी मानसूनी बरसात नहीं होगी. उत्तर प्रदेश के साथ देश के कई और राज्यों से सितंबर के अंतिम सप्ताह तक मानसून विदाई ले सकता है. उत्तर प्रदेश में मौसम की स्थिति लगातार बदल रही है. इसको लेकर मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार के अनुसार, शनिवार को प्रदेश के केंद्रीय भागों मे बारिश होने की संभावना थी. बाकी के क्षेत्र में मौसम सामान्य रही. हालांकि अब कुछ क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी. अतुल कुमार ने बताया कि निचले एवं मध्य क्षोभ मंडल में प्रदेश के उत्तर पूर्वी भाग से उत्तर पूर्वी अरब सागर तक जा रही है. द्रोणी के कारण अरब सागर से आ रही नमी के अतिरिक्त प्रदेश के उत्तरी पश्चिमी भाग पर अवस्थित पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना जताई जा रही है. इसके साथ ही पश्चिमी राजस्थान से मानसून वापसी आरंभ होने के साथ ही 21 सितंबर से पूरे उत्तर प्रदेश में वर्षा का वर्तमान दौर थम जाएगा. इसके उपरांत उत्तरी अंडमान सागर पर बने निम्न दबाव क्षेत्र के उत्तरोत्तर मजबूत होते हुए दक्षिण उड़ीसा- उत्तरी आंध्र प्रदेश तट की की ओर बढ़ने की संभावना के दृष्टिगत 23 सितंबर को पूर्वांचल से वर्षा का नया दौर आरंभ होकर 25 सितंबर तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश पहुंचने की संभावना है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, प्रदेश में सितंबर के महीने में 1 से लेकर 16 सितंबर तक औसत से चार फ़ीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. अगर वहीं केवल पूर्वी उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां औसत से 10 फ़ीसदी कम बारिश हुई है. इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में औसत से 5 फ़ीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई. रविवार को कई जगहों पर बादल का आवाजाही रहा कई जिलों में हल्की बारिश भी हुई. एक-दो दिन में तापमान धीरे-धीरे बढ़ने के आसार हैं. भारत 17 साल के सबसे सूखे मानसून की ओर बढ़ रहा है. 18 सितंबर तक जून से सितंबर के मानसून सीजन में देश में सामान्य से 15 प्रतिशत कम बारिश हुई. मौसम विज्ञान विभाग ने सामान्य से 8 प्रतिशत कम बारिश का अनुमान जताया था. बारिश की कमी बरकरार रही, तो यह 2019 के बाद सबसे कमजोर मानसून होगा. तब सामान्य से 18 प्रतिशत कम बारिश गिरा था. मानसून के अंतिम चरण में भी बारिश की कमी बनी हुई है. आईएमडी के अनुसार, सितंबर माह में कुछ हिस्सों में सामान्य से 50 प्रतिशत तक कम बारिश हुई. इससे पैदावार घटने व खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है. भारत में बारिश का 70 प्रतिशत हिस्सा मानसून से पूरा होता है।
