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उत्तर प्रदेश: सरकारी तालाब, बंजर भूमि और चकमार्ग पर कब्जे का आरोप, ग्रामीणों ने कार्रवाई की उठाई मांग
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: अंबेडकर नगर जिले की जलालपुर तहसील अंतर्गत भियांव ब्लॉक के ग्राम सभा मढ़वरपुर चक अजभुजगी में सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: अंबेडकर नगर जिले की जलालपुर तहसील अंतर्गत भियांव ब्लॉक के ग्राम सभा मढ़वरपुर चक अजभुजगी में सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कुछ भू-माफियाओं ने तालाब, बंजर भूमि तथा चकमार्ग पर कब्जा कर लिया है, जिससे न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा है बल्कि आम लोगों के आवागमन में भी भारी परेशानी उत्पन्न हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम सभा में स्थित तालाब की गाटा संख्या 78 का कुल क्षेत्रफल लगभग 32 बिस्वा दर्ज है। आरोप है कि भू-माफियाओं द्वारा वर्षों से किए जा रहे अतिक्रमण के कारण वर्तमान में तालाब का केवल लगभग 10 बिस्वा हिस्सा ही शेष बचा है। शेष भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया है, जिससे तालाब का स्वरूप और उपयोगिता प्रभावित हुई है। इसके अलावा बंजर भूमि गाटा संख्या 29 और 33 तथा चकमार्ग संख्या 37 पर भी अवैध कब्जे के आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चकमार्ग पर मकान निर्माण कर दिया गया है, जिससे गांव के लोगों का आवागमन बाधित हो रहा है। किसानों और ग्रामीणों को अपने खेतों तथा अन्य स्थानों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि इस संबंध में वर्षों पहले राजस्व विभाग की टीम और लेखपाल द्वारा जांच भी की गई थी। जांच के दौरान भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतों का संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। आरोप है कि जांच के बावजूद भू-माफियाओं का कब्जा आज भी बरकरार है और प्रशासन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। ग्रामीणों ने उत्तर प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन अंबेडकर नगर तथा जलालपुर तहसील प्रशासन से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए तथा चकमार्ग को कब्जामुक्त कर आमजन के आवागमन के लिए पुनः खोला जाए। अब लोगों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत कर आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी शीघ्रता से कदम उठाता है और सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने में कितना सफल होता है।
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