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उत्तर प्रदेश: नकली बीज कारोबार पर कसेगा शिकंजा, नया कानून लाने की तैयारी

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उत्तर प्रदेश  Published by: Anand Kumar(UP) , उत्तर प्रदेश  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 12/09/2026 04:05:35 pm Share:
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  • Published by.: Anand Kumar(UP) ,
  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
  • Date:
  • 12/09/2026 04:05:35 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: किसानों को नकली और घटिया गुणवत्ता वाले बीजों से बचाने के लिए केंद्र सरकार नया बीज कानून लाने की तैयारी में है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: किसानों को नकली और घटिया गुणवत्ता वाले बीजों से बचाने के लिए केंद्र सरकार नया बीज कानून लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून के लागू होने के बाद बीज कारोबार में नियमों को और सख्त किया जाएगा। नकली बीज बेचने, बिना पंजीकरण कारोबार करने और जानबूझकर धोखाधड़ी करने वालों पर भारी जुर्माने के साथ जेल की सजा का प्रावधान किए जाने की योजना है। प्रस्तावित कानून की सबसे अहम व्यवस्था हर बीज पैकेट पर क्यूआर कोड अनिवार्य करना बताई जा रही है। इस क्यूआर कोड के जरिए किसान बीज की उत्पत्ति, निर्माता, प्रयोगशाला से मिली मंजूरी और सप्लाई चेन में उसकी आवाजाही से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकेंगे। इससे बीज की गुणवत्ता को लेकर शिकायत सामने आने पर उसकी पूरी ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने और जिम्मेदारी तय करने में मदद मिलेगी।

जानकारी के मुताबिक प्रस्तावित कानून में नियमों के उल्लंघन को तीन श्रेणियों में बांटने का प्रावधान है। पहली श्रेणी में मामूली उल्लंघन करने वाले कारोबारियों को रखा जाएगा। पहली बार उल्लंघन पर चेतावनी और दोबारा नियम तोड़ने पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। दूसरी श्रेणी में जानबूझकर किए गए उल्लंघनों को शामिल किया जाएगा। इनमें बीज पैकेट पर क्यूआर कोड नहीं लगाना, आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराना और गलत ब्रांडिंग जैसे मामले शामिल किए जा सकते हैं। ऐसे मामलों में पहली बार अपराध पर एक लाख रुपये और दूसरी बार दो लाख रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव है। वहीं तीसरी श्रेणी में गंभीर अपराधों को रखा जाएगा। नकली बीज बेचना, बिना पंजीकरण के बीज कारोबार करना और जानबूझकर धोखाधड़ी जैसे मामलों में कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव है। गंभीर उल्लंघन करने वालों पर 30 लाख रुपये तक जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान किया जा सकता है।

प्रस्तावित कानून के तहत सभी बीज और रोपण सामग्री का राष्ट्रीय रजिस्टर में पंजीकरण अनिवार्य किए जाने की योजना है। बिना पंजीकरण वाले बीजों को अवैध माना जाएगा और उन्हें बाजार में बेचने की अनुमति नहीं होगी। सभी बीज किस्मों को एकीकृत राष्ट्रीय ऑनलाइन रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा, जिसे केंद्र और राज्य सरकारों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इससे पंजीकरण की प्रक्रिया में दोहराव से बचने में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार की ओर से नए कानून की जरूरत के पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि मौजूदा बीज अधिनियम वर्ष 1966 में बनाया गया था, जबकि बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू हुआ था। सरकार के अनुसार मौजूदा व्यवस्था में बदलते समय के अनुरूप पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं और अलग-अलग राज्यों में बीजों से संबंधित प्रक्रियाओं में भी अंतर है।

सरकार का यह भी तर्क है कि मौजूदा कानून के तहत दंड के प्रावधान पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं। इसके अलावा प्रभावी ट्रेसबिलिटी व्यवस्था नहीं होने के कारण यदि किसी बीज की गुणवत्ता खराब निकलती है या फसल प्रभावित होती है तो जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है। नए कानून में ट्रेसबिलिटी को अनिवार्य बनाकर इस समस्या का समाधान करने की योजना है। प्रस्तावित कानून में राज्य सरकारों को राज्य स्तरीय समितियों की सिफारिश पर नई बीज किस्मों को जारी करने का अधिकार देने का भी प्रावधान बताया गया है। हालांकि, राष्ट्रीय मानक लागू रहेंगे। इससे राज्यों को अपनी स्थानीय जलवायु और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार उपयुक्त बीज किस्मों को तेजी से उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। केंद्र सरकार का मानना है कि नया कानून लागू होने से बीज कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को नकली व घटिया बीजों से बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही बीज की पूरी सप्लाई चेन की निगरानी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना भी आसान हो सकेगा।