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उत्तर प्रदेश: कभी पत्रकार तो कभी मत्स्य अधिकारी बनकर करते थे वसूली, दो लाख से अधिक ऐंठे; दो गिरफ्तार

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उत्तर प्रदेश  Published by: Raju(UP) , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 12/09/2026 05:24:08 pm Share:
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  • Edited By.: Kunal Tewatia,
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  • 12/09/2026 05:24:08 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: कभी पत्रकार तो कभी मत्स्य विभाग का अधिकारी बनकर मछली पालकों को कार्रवाई और मुकदमे का डर दिखाने वाले गिरोह का बरेली पुलिस ने खुलासा किया है। भोजीपुरा और देवरनियां क्षेत्र में सामने आए मामलों में

विस्तार

उत्तर प्रदेश: कभी पत्रकार तो कभी मत्स्य विभाग का अधिकारी बनकर मछली पालकों को कार्रवाई और मुकदमे का डर दिखाने वाले गिरोह का बरेली पुलिस ने खुलासा किया है। भोजीपुरा और देवरनियां क्षेत्र में सामने आए मामलों में पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों साजिद और मोहम्मद आजम को गिरफ्तार किया है। ये गिरोह अब तक अलग-अलग लोगों से दो लाख रुपये से अधिक की रकम वसूल चुका है। कई लेनदेन ऑनलाइन किए जाने के स्क्रीनशॉट भी पुलिस के हाथ लगे हैं। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है भोजीपुरा निवासी सालिम रजा के मुताबिक, नौ सितंबर को उसके मोबाइल पर कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को मत्स्य विभाग का अधिकारी बताया। आरोप है कि इसके बाद गिरोह के लोग उसके तालाब तक पहुंचे और फोटो खींचे। मत्स्य विभाग की कार्रवाई कराने, मुकदमे में फंसाने और अन्य गंभीर परिणाम भुगतने का डर दिखाकर रुपये मांगे गए। पुलिस के मुताबिक, सालिम से आरोपियों ने 70 हजार रुपये वसूल लिए। दोबारा रुपये लेने के लिए साजिद पहुंचा तो उसे पकड़ लिया गया। 

उसके अन्य साथी मौके से निकल गए। सालिम की शिकायत पर भोजीपुरा थाने में चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया देवरनियां में भी चला यही खेल, मछली पालक से लिए 13 हजार पुलिस जांच आगे बढ़ी तो इसी तरह की एक और वारदात देवरनियां क्षेत्र में सामने आई। भूला भुलनिया गांव निवासी प्यारे लाल ने पुलिस को बताया कि छह सितंबर को कुछ लोगों ने खुद को मत्स्य विभाग का अधिकारी बताकर उन्हें डराया-धमकाया था। कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे 13 हजार रुपये लिए गए। देवरनियां पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर मोहम्मद आजम निवासी कर्मपुर चौधरी, इज्जतनगर को 11 सितंबर की रात करीब 9:50 बजे देवरनियां रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह ने इन दो घटनाओं के अलावा भी लोगों को इसी तरीके से निशाना बनाया। आरोपियों द्वारा विभिन्न व्यक्तियों से ऑनलाइन रुपये लेने से संबंधित स्क्रीनशॉट भी पुलिस को मिले हैं। अब तक दो लाख रुपये से अधिक का अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त करने की बात सामने आई है। पुलिस यह पता लगा रही है कि गिरोह ने जिले में कितने मछली पालकों और दूसरे लोगों से वसूली की। 

फरार और जांच में सामने आए अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगाई गई हैं पुलिस पूछताछ में खुला गिरोह का तरीका पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार साजिद ने पूछताछ में बताया कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर लोगों के सामने कभी पत्रकार, कभी मत्स्य अधिकारी तो कभी किसी दूसरे विभाग का अधिकारी बनकर पहुंचता था। इसके बाद कार्रवाई, मुकदमे और जेल भेजने का भय दिखाकर रुपये मांगे जाते थे। पुलिस का कहना है कि मोहम्मद आजम ने भी पूछताछ में मछली पालन करने वाले लोगों को कार्रवाई का डर दिखाकर नकद और ऑनलाइन रुपये लेने की बात स्वीकार की है। पुलिस के अनुसार वसूली गई रकम गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। पुलिस जांच में रिजवान खान निवासी कर्मपुर चौधरी, बसंत शर्मा निवासी कासगंज और अरविंद का नाम भी सामने आया है। पुलिस इनकी भूमिका की जांच करने के साथ गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। मोहम्मद आजम के खिलाफ भोजीपुरा और देवरनियां के मामलों समेत पूर्व के अन्य मुकदमों का आपराधिक इतिहास भी पुलिस ने जारी किया है एक निरीक्षक के भरोसे मत्स्य विभाग,

फर्जी अफसरों की शिकायतों ने बढ़ाई चिंता इस पूरे मामले ने मत्स्य विभाग की निगरानी पर भी सवाल खड़े किए हैं। विभागीय जानकारी के मुताबिक जिले में वर्तमान में एक मत्स्य निरीक्षक तैनात है। पिछले कुछ समय से देवरनियां, भोजीपुरा समेत कई क्षेत्रों में खुद को मत्स्य विभाग से जुड़ा बताकर लोगों से वसूली किए जाने की शिकायतें विभाग तक पहुंच रही थीं। मत्स्य विभाग की सहायक निदेशक गायत्री पांडेय के मुताबिक, मीरगंज में प्रतिबंधित मछली के पालन की शिकायत पर जांच और कार्रवाई के दौरान भी मछली पालकों ने फर्जी मत्स्य निरीक्षक बनकर वसूली किए जाने की जानकारी दी थी। स्थानीय लोगों की ओर से एक वीडियो भी विभाग को उपलब्ध कराया गया था। इसके बाद स्थानीय पुलिस को सूचना देकर कार्रवाई के लिए कहा गया। पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। अन्य आरोपियों की तलाश के साथ पुलिस अब गिरोह के पुराने लेनदेन और ऑनलाइन भुगतान की भी पड़ताल कर रही है।