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उत्तर प्रदेश: किसानों को मिली जल बचत वाली खेती की जानकारी, ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक पर दियाजोर
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: जिला उद्यान अधिकारी समुद्रगुप्त मल्ल ने बताया है कि दिनांक 16 से 22 जुलाई तक मनाए जा रहे भूगर्भ जल सप्ताह के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन विभिन्न विभागों द्वारा किया जा रहा है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: जिला उद्यान अधिकारी समुद्रगुप्त मल्ल ने बताया है कि दिनांक 16 से 22 जुलाई तक मनाए जा रहे भूगर्भ जल सप्ताह के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन विभिन्न विभागों द्वारा किया जा रहा है। इसी क्रम में विकास खंड नाथनगर में अवस्थित राजकीय बाग घोरहट में उद्यान एवं लघु सिंचाई विभाग के तत्वाधान में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर पद्धतियों का प्रदर्शन एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए जिला उद्यान अधिकारी द्वारा बताया गया कि उद्यान विभाग के अंतर्गत संचालित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में कृषको के प्रक्षेत्र पर ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धतियां स्थापित की जाती हैं| ड्रिप सिंचाई पद्धति का अर्थ है ऐसी पद्धति जिसमें फसलों को बूंद बूंद पानी प्रदान किया जाए| ड्रिप सिंचाई पद्धति उन फसलों के लिए कारगर है जो एक निश्चित दूरी पर बोई जाएं, जैसे- केला, सब्जियां, गन्ना, बागवानी फसलें इत्यादि। स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति का अर्थ है ऐसी पद्धति जिसमें पौधों को फव्वारा के माध्यम से जल प्रदान किया जाए, स्प्रिंकलर पद्धति में उपयोग के अनुसार कई पद्धतियों का समावेश है, जैसे पोर्टेबल स्प्रिंकलर, मिनी स्प्रिंकलर, माइक्रो स्प्रिंकलर तथा रेनगन। इन सभी पद्धतियों के माध्यम से फव्वारा के द्वारा सिंचाई की जाती है। यह पद्धति उन सभी फसलों में लाभदायक है जो 1.5 मीटर से कम ऊंचाई की हो,जैसे- धान,गेहूं, सब्जियां, फूल इत्यादि। इस पद्धति के प्रयोग से परंपरागत सिंचाई पद्धति के सापेक्ष लगभग 25-40 % तक जल उपयोग में कमी आती है जबकि उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि होती है। उद्यान विभाग के द्वारा इस योजना में ड्रिप एवं मिनी एवं माइक्रो स्प्रिंकलर की स्थापना पर 90% जबकि रेनगन एवं पोर्टेबल स्प्रिंकलर की स्थापना पर 75% का अनुदान देय है। इसी क्रम में सहायक अभियंता लघु सिंचाई द्वारा अवगत कराया गया कि खेत तालाब योजना के अंतर्गत कृषक बंधु अपने खेत मे छोटे तालाब का निर्माण कर उसमें मछली पालन एवं मखाना की खेती कर सकते हैं। जिससे एक अतिरिक्त आय के साथ-साथ जल संरक्षण एवं संवर्द्धन भी होगा। ज्ञातव्य है कि तालाब निर्माण हेतु भूमि संरक्षण विभाग, मत्स्य पालन हेतु मत्स्य विभाग एवं मखाना की खेती हेतु उद्यान विभाग में कार्यक्रम संचालित हैं। इस अवसर पर राजकीय बाग परिसर में 500 फलदार पौधों का रोपण भी किया गया जिसमें आम,अमरूद, नींबू,लीची इत्यादि सम्मिलित हैं।
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