Contact for Advertisement 9650503773


उत्तर प्रदेश: भोजीपुरा सीट पर BJP टिकट को लेकर घमासान युद्ध , कई दिग्गज दावेदारों में कड़ी टक्कर

- Photo by : social media

उत्तर प्रदेश  Published by: Chhatra Pal , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 13/04/2026 11:13:06 am Share:
  • उत्तर प्रदेश
  • Published by.: Chhatra Pal ,
  • Edited By.: Kunal,
  • Date:
  • 13/04/2026 11:13:06 am
Share:

संक्षेप

उत्तर प्रदेश: भोजीपुरा से बीजेपी के टिकट के मामले में कौन होगा सफल, किसे मिलेगा भाजपा का भोजीपुरा विधानसभा सीट पर भाजपा के टिकट को लेकर इस बार जबरदस्त घमासान देखने को मिल रहा है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: भोजीपुरा से बीजेपी के टिकट के मामले में कौन होगा सफल, किसे मिलेगा भाजपा का भोजीपुरा विधानसभा सीट पर भाजपा के टिकट को लेकर इस बार जबरदस्त घमासान देखने को मिल रहा है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ उम्मीदवार घोषित करना नहीं, बल्कि ऐसा चेहरा चुनना है जो जातीय समीकरण, संगठनात्मक पकड़ और व्यक्तिगत प्रभाव—तीनों में संतुलन बना सके। यही वजह है कि इस सीट पर दावेदारों की लंबी कतार है और हर कोई अपनी-अपनी ताकत के दम पर टिकट पाने की कोशिश में जुटा है।अगर प्रमुख दावेदारों की बात करें तो योगेश पटेल का नाम सबसे आगे माना जाता है। ब्लॉक प्रमुख होने के नाते उनकी ग्रामीण इलाकों में मजबूत पकड़ है और कुर्मी समाज में उनका प्रभाव भी अच्छा माना जाता है। पिछली बार भाजपा से टिकट न मिलने पर उन्होंने बसपा से चुनाव लड़ा था, जिससे कुर्मी वोटों में बिखराव हुआ और सपा को फायदा मिला। 

यही कारण है कि इस बार उनकी दावेदारी को भाजपा नजरअंदाज नहीं कर सकती, लेकिन पार्टी उनके पुराने रुख को भी ध्यान में रखेगी।वहीं प्रशांत पटेल, जो जिला पंचायत प्रतिनिधि हैं, युवाओं के बीच सक्रियता और जमीनी संपर्क के लिए जाने जाते हैं। उनका फायदा यह है कि वे अपेक्षाकृत नया चेहरा हैं और संगठन के साथ तालमेल बनाए हुए हैं, जिससे पार्टी उन्हें एक फ्रेश और कम विवादित विकल्प के तौर पर देख सकती है।एमएलसी बहोरन लाल मौर्य की बात करें तो उनका राजनीतिक अनुभव और मौर्य समाज में मजबूत पकड़ उन्हें इस दौड़ में काफी अहम बनाती है। मौर्य वोट बैंक इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभाता है, ऐसे में बहोरन लाल मौर्य का अनुभव, संगठन में उनकी पहचान और राज्य स्तर की राजनीति में सक्रियता उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।इसके अलावा भुवनेश गंगवार, जो पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह के पुत्र हैं, वे भी अपनी पारिवारिक राजनीतिक विरासत और क्षेत्र में पहचान के चलते टिकट की दौड़ में शामिल हैं। 

गंगवार समाज में उनकी पैठ और पुराने समर्थकों का नेटवर्क उनके पक्ष में जाता है, हालांकि उन्हें खुद को पूरी तरह स्थापित करने की चुनौती भी है।भोजीपुरा सीट को आमतौर पर मौर्य और कुर्मी वोटरों का गढ़ माना जाता है, ऐसे में भाजपा के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह ऐसा उम्मीदवार चुने जो इन दोनों वर्गों में संतुलन बना सके और वोटों का बिखराव न होने दे। पिछले चुनाव का अनुभव पार्टी के सामने है, जब योगेश पटेल के बसपा से चुनाव लड़ने के कारण कुर्मी वोट बंटे और सपा ने बाजी मार ली।इसीलिए इस बार भाजपा बेहद सतर्क रणनीति के तहत फैसला लेने की तैयारी में है। पार्टी हाईकमान स्थानीय संगठन की रिपोर्ट, दावेदारों की स्वीकार्यता, जातीय समीकरण और विपक्ष की संभावित रणनीति को ध्यान में रखकर अंतिम निर्णय करेगा। फिलहाल मुकाबला पूरी तरह खुला हुआ है और यही वजह है कि भोजीपुरा सीट पर टिकट की जंग प्रदेश की सबसे दिलचस्प सियासी लड़ाइयों में से एक बन गई है।

Related News

मध्य प्रदेश: ह्वेनसांग जयंती पर मिशन महाराजा बलि सेना ने दी श्रद्धांजलि, बौद्ध दर्शन के प्रचार को बताया प्रेरणा स्रोत

राजस्थान: राहेड़ा में प्रवेशोत्सव कार्यक्रम एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का सम्मान समारोह धूमधाम से हुआ सम्पन्न

ओडिशा: हाडपदा गांव में फुलदोल मेला महोत्सव धूमधाम से संपन्न, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल

उत्तर प्रदेश: यूपी बोर्ड रिजल्ट 28–29 अप्रैल को संभावित, तैयारी अभी भी अंतिम चरण में

उत्तर प्रदेश: गाजीपुर में मंगई नदी पुल का भव्य उद्घाटन, जनसमूह की भारी मौजूदगी में अपना पुल’ का लोकार्पण

उत्तर प्रदेश: विश्व हिंदू परिषद–बजरंग दल की भगवा यात्रा निकली, महानगर राममय व भगवामय हुआ


Featured News