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उत्तर प्रदेश: मजहबी दीवारें टूटीं मुस्कान–कुनाल ने वैदिक रीति से रचाई शादी
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: समाजिक बंधनों और धार्मिक सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए बिजनौर की मुस्कान खान और बरेली के कुनाल ने अपने प्रेम को एक नई पहचान दे दी। अलग-अलग मजहब से आने वाले इस जोड़े ने तमाम विरोधों के बावजूद एक-दूसरे का साथ निभाने का निर्णय लिया और वैवाहिक बंधन में बंध गए।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: समाजिक बंधनों और धार्मिक सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए बिजनौर की मुस्कान खान और बरेली के कुनाल ने अपने प्रेम को एक नई पहचान दे दी। अलग-अलग मजहब से आने वाले इस जोड़े ने तमाम विरोधों के बावजूद एक-दूसरे का साथ निभाने का निर्णय लिया और वैवाहिक बंधन में बंध गए। बिजनौर के नजीबाबाद की निवासी मुस्कान खान ने अपने प्रेमी कुनाल के साथ जीवन बिताने के लिए परिवार की असहमति के बावजूद बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म को अपनाते हुए अपने रिश्ते को सामाजिक मान्यता दिलाई। मुस्कान का कहना है कि उनका रुझान पहले से ही राधा-कृष्ण की भक्ति की ओर था, जो समय के साथ और गहरा होता गया। अगस्त्य मुनि आश्रम में वैदिक रीति से संपन्न हुआ विवाह बरेली स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम में दोनों का विवाह वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया। आश्रम के आचार्य पंडित के.के. शंखधार ने विधिवत शुद्धिकरण संस्कार के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि को साक्षी मानकर दोनों का विवाह कराया। सात फेरों के साथ दोनों ने जीवनभर साथ निभाने की प्रतिज्ञा ली। मुस्कान ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय उन्होंने पूरी तरह अपनी स्वेच्छा से लिया है। उन्होंने कहा कि अब उनकी आस्था सनातन परंपराओं में है और वह अपने पति कुनाल के साथ धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगी। विवाह के बाद दोनों के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ दिखाई दी।
पंडित शंखधार फिर बने चर्चा का विषय इस विवाह के बाद आचार्य पंडित के.के. शंखधार एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। बताया जा रहा है कि वह पूर्व में भी कई अंतरधार्मिक विवाह संपन्न करा चुके हैं और अब तक बड़ी संख्या में ऐसे विवाहों में भूमिका निभा चुके हैं
मुस्कान और कुनाल की यह कहानी एक बार फिर यह संदेश देती है कि जब इरादे दृढ़ हों, तो सामाजिक और धार्मिक बाधाएं भी रास्ता नहीं रोक पातीं। यह विवाह प्रेम, विश्वास और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मिसाल बनकर सामने आया है।
