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उत्तर प्रदेश: जर्मनी-अमेरिका ट्रेड फेयर से पूर्वांचल के कालीन कारोबार को मिली नई उम्मीद
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: पूर्वांचल का पारंपरिक कालीन उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की उम्मीद लगाए बैठा है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: पूर्वांचल का पारंपरिक कालीन उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की उम्मीद लगाए बैठा है। जनवरी के अंत में जर्मनी और अमेरिका में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय ट्रेड फेयर को लेकर पूर्वांचल के कालीन कारोबारियों में खासा उत्साह है। कारोबारियों का कहना है कि इस ट्रेड फेयर के जरिए करोड़ों रुपए की नये ऑर्डर मिलने की संभावना बन सकती है, जिससे पिछले कुछ महीनो में आई गिरावट से उबरने मे मदद मिलेगी। अमेरिका टैरिफ नीति सख्ती के बाद निर्यातकों ने रणनीति बदलनी शुरू कर दी है। अब यूरोपीय देशों में निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। जर्मनी में लगने वाले ट्रेड फेयर भी इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि यदि उत्तर प्रदेश से बड़े ऑर्डर मिलते हैं, तो अमेरिकी नुकसान की भरपायी काफी हद तक हो सकती है। फिलहाल पूर्वांचल का कालीन उद्योग लगभग 5500 करोड़ रुपए के सालाना कारोबार पर टिका है। इस उद्योग से लाखों बुनकर, शिल्पकार और छोटे व्यापारी जुड़े हुए हैं। अमेरिका जैसे बड़े बाजार में आई गिरावट का असर सीधे तौर पर इन लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ा है। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड फेयर से मिलने वाले संभावित ऑर्डर कारोबार को रफ्तार देने के साथ ही बुनकरों और शिल्पियों के चेहरे पर फिर से मुस्कान ला सकते हैं। कारोबारी के मुताबिक, पहले हाथ से बने कालीनों पर अमेरिका में किसी प्रकार का टैरिफ नहीं लगाया जाता था, लेकिन अन्य भारतीय उत्पादों पर अलग-अलग श्रेणियों में 10 प्रतिशत तक शुल्क लगने से भारतीय सामान वहां महंगा हो गया। इसका असर यह हुआ कि अमेरिकी बाजार में मांग कमजोर पड़ी और पूर्वांचल के निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ा। कालीन उत्पादकों का कहना है कि अमेरिका लंबे समय से भारत के कृषि, पशुपालन और डेयरी सेक्टर में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश करता रहा, लेकिन इसके साथ-साथ भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों का सबसे बड़ा बाजार भी अमेरिका ही है। पूर्वांचल निर्यातक संघ के अध्यक्ष रघु मेहरा के मुताबिक, पूर्वांचल से हर साल 6 से 7 हजार करोड़ रुपए के उत्पाद अमेरिका को निर्यात किए जाते हैं। इसमें कालीन, वॉल हैंगिंग, दरी, बनारसी साड़ी, सिल्क उत्पाद और हस्तनिर्मित खिलौने शामिल हैं। भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी और आसपास के इलाकों मे तैयार होने वाले कालीन दुनिया भर में अपनी गुणवत्ता और कारीगरी के लिए पहचाने जाते हैं।