-
☰
उत्तर प्रदेश: पाइल्स सर्जरी के बाद भी नहीं मिली छुट्टी, लोको पायलट को अफसरों के सामने उतारने पड़े कपड़े; वीडियो वायरल
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: भारतीय रेलवे के लखनऊ रेल मंडल से एक ऐसी शर्मनाक और अमानवीय घटना सामने आई है, जिसने रेल प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं यहाँ एक लोको पायलट को अपनी बीमारी और सर्जरी के
विस्तार
उत्तर प्रदेश: भारतीय रेलवे के लखनऊ रेल मंडल से एक ऐसी शर्मनाक और अमानवीय घटना सामने आई है, जिसने रेल प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं यहाँ एक लोको पायलट को अपनी बीमारी और सर्जरी के घाव साबित करने के लिए अपने वरिष्ठ अधिकारी के सामने कपड़े उतारने पर मजबूर होना पड़ा इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया और रेलवे कर्मचारियों के व्हाट्सएप ग्रुप्स में वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है, मिली जानकारी के अनुसार, अनुसूचित जनजाति समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोको पायलट राजेश मीना ने बीती 22 फरवरी को पाइल्स (बवासीर) की सर्जरी कराई थी डॉक्टर ने उन्हें 28 फरवरी तक आराम की सलाह दी थी, लेकिन घाव गहरा होने के कारण वे पूरी तरह ठीक नहीं हो सके नियमों के तहत जब उन्होंने रेलवे हेल्थ यूनिट से अवकाश बढ़ाने की मांग की, तो डॉक्टर ने उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों से 'सिक मेमो' लाने को कहा। अधिकारियों की संवेदनशीलता पर सवाल ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) का आरोप है कि राजेश मीना ने पहले क्रू कंट्रोलर और फिर चीफ क्रू कंट्रोलर रतन कुमार से गुहार लगाई उन्होंने अपनी मेडिकल रिपोर्ट, लैब दस्तावेज और यहाँ तक कि अपने घाव की ड्रेसिंग भी दिखाई, लेकिन अधिकारियों का दिल नहीं पसीजा और उन्हें छुट्टी देने से साफ इनकार कर दिया गया शारीरिक पीड़ा और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर राजेश मीना ने अंततः दफ्तर में ही अपने कपड़े उतारकर ऑपरेशन के ताज़ा घाव दिखाए, ताकि अधिकारी उनकी स्थिति पर यकीन कर सकें कर्मचारी संगठनों में भारी आक्रोश AILRSA के महासचिव के. सी. जेम्स ने इस घटना को बेहद शर्मनाक और अमानवीय करार दिया है उन्होंने कहा कि यह कितनी विडंबना है कि हजारों यात्रियों की जान बचाने वाले एक लोको पायलट को अपनी बीमारी साबित करने के लिए इस हद तक गिरना पड़ा कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। प्रशासन की चुप्पी इस संवेदनशील मामले पर उत्तरी रेलवे के लखनऊ मंडल के आला अधिकारियों ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि बीमार लोको पायलट से जबरन ड्यूटी कराना न केवल कर्मचारी का उत्पीड़न है, बल्कि रेल सुरक्षा के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि निचले स्तर के कर्मचारियों के प्रति रेलवे का प्रशासनिक ढांचा कितना संवेदनहीन हो चुका है।