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उत्तर प्रदेश: कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर बाजारों में बढ़ी रौनक, मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे मूर्तिकार
- Photo by : SOCIAL MEDIA
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: सोनभद्र में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व को लेकर जिले में तैयारियां तेज हो गई हैं।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: सोनभद्र में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व को लेकर जिले में तैयारियां तेज हो गई हैं। घरों से लेकर मंदिरों तक भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। बाजारों में भी रौनक बढ़ने लगी है और मूर्तिकार लड्डू गोपाल की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। जन्माष्टमी को लेकर सोनभद्र जिला मुख्यालय समेत आसपास के क्षेत्रों के बाजारों में भगवान श्रीकृष्ण की पोशाक, मुकुट, पगड़ी, मोर पंख, बांसुरी, मटकी, आसन, लटकन और झूलों की मांग बढ़ गई है। महिलाएं और श्रद्धालु पूजन सामग्री तथा कान्हा के श्रृंगार का सामान खरीदने के लिए बाजारों में पहुंच रहे हैं। दुकानदारों ने भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग डिजाइन की लड्डू गोपाल की मूर्तियां और पूजा-सजावट का सामान सजाया है। बाजारों में लटकन वाले झूले करीब 200 से 2400 रुपये, मुकुट 20 से 250 रुपये, पगड़ी 30 से 180 रुपये, लड्डू गोपाल के वस्त्र 20 से 450 रुपये, कान्हा के वस्त्र 150 से 400 रुपये, राधा के वस्त्र 250 से 450 रुपये, सजी हुई बांसुरी 20 से 120 रुपये और मोती की माला 30 से 150 रुपये तक उपलब्ध है। इस बार दिल्ली के अलावा वृंदावन और मथुरा से भी भगवान श्रीकृष्ण के लिए विशेष पोशाक और वस्त्र मंगाए गए हैं। मंदिरों में साफ-सफाई के साथ सजावट का काम भी शुरू हो गया है। कारीगर रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों की मालाओं और चमकीली लड़ियों से मंदिरों को सजाने में जुटे हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से संबंधित आकर्षक झांकियां भी सजाई जाएंगी। बाजार में रंग-बिरंगी लाइटों से तैयार कान्हा जी का फूल बंगला भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। क्षेत्र के घरों में भी जन्माष्टमी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। श्रद्धालु पूजन सामग्री की खरीदारी कर रहे हैं। दुकानदारों को इस बार अच्छी बिक्री की उम्मीद है। उनका कहना है कि जन्माष्टमी नजदीक आने के साथ बाजार में ग्राहकों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। दुद्धी तहसील क्षेत्र के धनौरा गांव निवासी पं. त्रिभुवन तिवारी के अनुसार, पंचांग के मुताबिक भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 की रात 2:45 बजे शुरू होगी और 5 सितंबर की रात 12:13 बजे समाप्त होगी। ऐसे में तिथि के अनुसार जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को ही मनाया जाएगा। मध्य रात्रि के समय अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा का संयोग बनने की बात भी कही गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को हुआ था, इसलिए मध्य रात्रि में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
