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उत्तर प्रदेश: मौत के प्रमाण पत्र पर उठे सवाल, फर्जी हस्ताक्षर-मोहर से दस्तावेज तैयार करने का लगा आरोप

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उत्तर प्रदेश  Published by: Raju(UP) , उत्तर प्रदेश  Edited By: Yashoda, Date: 01/09/2026 01:53:45 pm Share:
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  • Edited By.: Yashoda,
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  • 01/09/2026 01:53:45 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: बरेली नगर पंचायत धौंरा टांडा के वार्ड नंबर-2 से एक व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: बरेली नगर पंचायत धौंरा टांडा के वार्ड नंबर-2 से एक व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए फर्जी हस्ताक्षर, फर्जी मोहर और कथित रूप से झूठे शपथ-पत्रों का इस्तेमाल कर दस्तावेज तैयार किए गए। मामले में नगर पंचायत के वर्तमान सभासद राकेश कुमार समेत कई लोगों की भूमिका की जांच की मांग की गई है डीएम की अनुपस्थिति में प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा ज्ञापन शिकायतकर्ता के मुताबिक यह ज्ञापन जनता से मिलने का निर्धारित समय निकल जाने के बाद जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में प्रशासनिक अधिकारी नरेंद्र प्रताप सिंह, बरेली को सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। 

पहले भी प्रमाण पत्र बनवाने का प्रयास

प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया गया है कि अशोक कुमार पुत्र स्वर्गीय रामदुलारे का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए करीब एक वर्ष पूर्व भी एसडीएम सदर बरेली के कार्यालय में अधिवक्ता इमरान अहमद के माध्यम से आवेदन किया गया था। हालांकि उस समय मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका। शिकायत के अनुसार इसके बाद दोबारा प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया शुरू की गई नगर पंचायत स्तर पर शुरू हुई  जांच मामले की जानकारी नगर पंचायत धौंरा टांडा के अधिकारियों तक पहुंचने के बाद जन्म-मृत्यु संबंधी जांच से जुड़े कर्मचारी शाने हैदर को जांच के निर्देश दिए गए। शिकायतकर्ता ने प्रार्थना पत्र में नगर पंचायत की ओर से जारी पत्र संख्या 198/एनपी धौंरा टांडा/2026-27, दिनांक 16 जुलाई 2026 का भी उल्लेख किया है जांच में पुराने दस्तावेजों पर भी उठे सवाल शिकायत में दावा किया गया है कि जांच के दौरान दिए गए जवाब में करीब एक वर्ष पहले भी अशोक कुमार का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कथित कूटरचित दस्तावेज तैयार किए जाने की बात सामने आई। आरोप है कि इस प्रक्रिया में नगर पंचायत के वर्तमान सभासद राकेश कुमार और उनके साथियों की भूमिका रही दोबारा आवेदन में फर्जी हस्ताक्षर और मोहर का आरोप शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद दोबारा मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जन्म-मृत्यु जांचकर्ता शाने हैदर तथा नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी के कथित हस्ताक्षर और मोहर का इस्तेमाल करते हुए दो गवाहों के शपथ-पत्र तैयार कराए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर एसडीएम सदर बरेली के कार्यालय में मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किए जाने का आरोप लगाया गया है।  दस्तावेजों को असली दिखाने का प्रयास करने का आरोप शिकायत में कहा गया है कि आवेदन में लगाए गए हस्ताक्षर और मोहर वास्तविक अधिकारियों के न होकर कथित रूप से फर्जी हैं। शिकायतकर्ता ने जांच से संबंधित जवाब और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रस्तुत आवेदन की प्रतियां भी प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न किए जाने की बात कही है आरोप यह भी है कि कुछ सरकारी कर्मचारियों और अधिवक्ता की कथित मिलीभगत से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से संबंधित आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए गए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों की जांच और सक्षम स्तर से होने वाली जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी जांच के बावजूद कार्रवाई न होने पर उठाए सवाल। 

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कथित फर्जीवाड़े की जानकारी सामने आने के बावजूद अब तक संबंधित लोगों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। प्रार्थना पत्र में पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग की गई है। डीएम से उच्चस्तरीय जांच की मांग शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही कथित कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, फर्जी हस्ताक्षर और मोहर का इस्तेमाल करने तथा झूठे शपथ-पत्र प्रस्तुत करने में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच कर दोष सिद्ध होने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया है। रिकॉर्ड और फोरेंसिक जांच से साफ होगी तस्वीर मामले में दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। संबंधित अधिकारियों के वास्तविक हस्ताक्षरों और कथित हस्ताक्षरों का मिलान, मोहरों की जांच, शपथ-पत्रों की सत्यता, आवेदन जमा किए जाने की प्रक्रिया और एसडीएम सदर कार्यालय के रिकॉर्ड की पड़ताल से पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकती है। साथ ही यह भी पता लगाया जा सकता है कि कथित दस्तावेज किसने तैयार किए और उनका इस्तेमाल किस स्तर पर किया गया।