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उत्तर प्रदेश: साहित्यकार संगम संस्था ने हिंदी दिवस पर आयोजित की भव्य काव्य संध्या, कवियों ने रचनाओं से बांधा समां
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: साहित्यकार संगम संस्था के तत्वावधान में दिनांक 20 सितम्बर रविवार को जेवर अड्डा स्थित नारायण समाचार पत्रालय में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में एक काव्य संध्या का आयोजन किया गया
विस्तार
उत्तर प्रदेश: साहित्यकार संगम संस्था के तत्वावधान में दिनांक 20 सितम्बर रविवार को जेवर अड्डा स्थित नारायण समाचार पत्रालय में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में एक काव्य संध्या का आयोजन किया गया कार्यक्रम का शुभारम्भ संस्था के अध्यक्ष प्रेम कुमार शर्मा एवं संस्था सचिव डॉ. विश्वम्भर दयाल अवस्थी ' विद्या - सागर ' ने माँ सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इसके पश्चात् माँ सरस्वती की वंदना के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। गोष्ठी में रामनिवास कंसल ने " संस्कृत का श्रंगार है हिंदी, भारत का अभिमान है। एक सहज और मीठी वाणी, हर दिन का सम्मान है।। " कविता पढ़ी। प्रमोद चन्द्र गौड़ ने " मैं राष्ट्र गगन के मस्तक, सदियों से अंकित बिंदी हैं। " वेदप्रकाश गौतम अंकुर ने " हिंदी अमर रही है, अमर रहेगी। अमर गिरा मेरी हिंदी है। " डॉ. केशव कल्पांत ने " मूर्ति गायब है,क्या भीड़ लगा रखी है। प्रेम कुमार शर्मा ने " हिंदी सुत अब होश में आओ, निज भाषा के बचाने को।
पूरे मन से जोर लगाओ, हिंदी का मान बढ़ाने को।। "कविता पढ़ी। डॉ. विश्वम्भर दयाल अवस्थी ' विद्या - सागर ' ने संस्कृत की बेटी हिंदी, भाषाओं में जेठी हिंदी।
भारत को खेती है हिंदी, सबसे प्यारी मेरी हिंदी।। " कविता पढ़कर श्रोताओं को मन्त्र मुग्ध कर दिया। दुष्यंत कुमार ने भी हिंदी भाषा कोअधिकतर लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा बताया।
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