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गुजरात: आदिवासी राजा भील स्नेह मिलन की तैयारी, समाज की एकता व अधिकारों पर मंथन

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गुजरात  Published by: Gheesaram Fuaji Choudhary , Date: 16/12/2025 04:35:14 pm Share:
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  • 16/12/2025 04:35:14 pm
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संक्षेप

गुजरात: डांग जिले में आगामी दिनों में आयोजित होने वाले 'आदिवासी राजा भील स्नेह मिलन' कार्यक्रम की योजना बनाने हेतु भील राजाओं (राजवी) की अध्यक्षता में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

विस्तार

गुजरात: डांग जिले में आगामी दिनों में आयोजित होने वाले 'आदिवासी राजा भील स्नेह मिलन' कार्यक्रम की योजना बनाने हेतु भील राजाओं (राजवी) की अध्यक्षता में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य डांग के भील समाज को एकता के सूत्र में बांधना, सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना और समाज के अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने पर चर्चा करना था। इस बैठक में डांग जिले के तीनों तालुकों सुबीर, आहवा और वघई से भील समाज के नेताओं सहित पांच राजा (राजवी श्री) उपस्थित रहे, जिनके नाम निम्नलिखित हैं। धनराज सिंह चंद्र सिंह सूर्यवंशी, छत्रसिंह भवरसिंह सूर्यवंशी, त्रिमकराव साहेबराव पवार, तपतराव आनंदराव पवार, वासुरणा स्टेट के राजा श्री धनराज सिंह सूर्यवंशी ने कहा कि कुकणा, वारली और अन्य आदिवासी समुदायों की तरह भील राजाओं का भी स्नेह मिलन आयोजित हो, इसी उद्देश्य से यह बैठक बुलाई गई है। उन्होंने आगे कहा, "आज तक हम केवल होली के पर्व पर आयोजित होने वाले 'डांग दरबार' के अवसर पर ही एक साथ मिल पाते थे, जहाँ पांच राजा, नौ नायक और सात सौ भाऊबंद (रिश्तेदार/समुदाय के सदस्य) मिलकर बिछड़ जाते थे। उसके बाद लंबे समय तक एक-दूसरे का हाल-चाल नहीं जान पाते थे।" इस विशाल डांग भील राजवी परिवार को स्थायी रूप से प्रेम और आत्मीयता के साथ जोड़ने के लिए नियमित स्नेह मिलन आवश्यक है। बैठक में आगामी स्नेह मिलन और संगठन के कार्यों के लिए निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर विशेष बल दिया गया। अधिकारों का संरक्षण: डांग के भील समाज परिवार के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए सभी को मिलकर कार्य करना। सांस्कृतिक विरासत: आदिवासी संस्कृति के पारंपरिक उत्सव, त्यौहार, पूजा विधि आदि को जीवित रखना, ताकि आने वाली पीढ़ी इस विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संजो सके। नए संगठनात्मक ढांचे का निर्माण: आगामी स्नेह मिलन को ध्यान में रखते हुए तीनों तालुकों में 'राजवी भील संगठन' के अध्यक्ष और सचिवों की नियुक्ति की गई है, जो समाज के कार्यों का नेतृत्व करेंगे। विशेष रूप से वासुरणा स्टेट के राजा ने बताया कि आने वाले स्नेह मिलन कार्यक्रम में डांग के कुल 311 गांवों के पुलिस पटेल, कारभारी और जागलिया को भी आमंत्रित किया जाएगा। इसका कारण यह है कि ब्रिटिश काल के दौरान वे डांग के जंगलों की रक्षा करते थे और जंगल में आग लगने पर उसे बुझाने का कार्य करते थे। साथ ही, वे गांवों में रहकर सामाजिक कार्य भी संभालते थे। उस परंपरा को पुनर्जीवित करने और उन्हें डांग दरबार में मिलने वाली नकद राशि या उपहार स्वरूप मिलने वाले बर्तनों की प्रथा को फिर से शुरू करने के बारे में चर्चा की जाएगी।