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महाराष्ट्र: आरटीआई कार्यकर्ताओं ने सूचना का अधिकार नियमों में बदलाव के खिलाफ उठाई आवाज
- Photo by : social media
संक्षेप
महाराष्ट्र: सूचना का अधिकार कार्यकर्ता महासंघ और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र सूचना के अधिकार नियम 2026 को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया है।
विस्तार
महाराष्ट्र: सूचना का अधिकार कार्यकर्ता महासंघ और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र सूचना के अधिकार नियम 2026 को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया है। कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर, तहसीलदार एवं संबंधित अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर नए नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि महाराष्ट्र सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत लागू किए गए नए नियमों से आरटीआई कानून के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंच रहा है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि नए प्रावधान पारदर्शिता बढ़ाने के बजाय प्रशासनिक गोपनीयता को बढ़ावा देने वाले हैं। आरटीआई कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन में कई आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत सूचना के अधिकार आवेदन शुल्क में वृद्धि की गई है। आवेदन शुल्क 10 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये, प्रथम अपील शुल्क 20 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये और द्वितीय अपील शुल्क 20 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा सूचना के प्रति पृष्ठ शुल्क भी 2 रुपये से बढ़ाकर 5 रुपये किया गया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे आम और गरीब नागरिकों के लिए सूचना प्राप्त करना कठिन हो जाएगा। कार्यकर्ताओं ने नए नियमों में आवेदन के साथ सूचना मांगने का कारण बताने और भारतीय नागरिकता प्रमाण प्रस्तुत करने की अनिवार्यता पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(2) की भावना के विपरीत है, क्योंकि मूल कानून के अनुसार किसी नागरिक को सूचना मांगने का कारण बताने की आवश्यकता नहीं होती। ज्ञापन में कहा गया कि सूचना का अधिकार कानून लोकतंत्र को मजबूत करने और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में नियमों के माध्यम से नागरिकों के अधिकारों को सीमित करना उचित नहीं है। आरटीआई कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र सरकार से मांग की है कि महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम 2026 के विवादित प्रावधानों को तत्काल वापस लिया जाए और पहले की व्यवस्था बहाल की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर राज्यभर में आंदोलन किया जाएगा और कानूनी कार्रवाई का सहारा लिया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में मनोज रमेशराव सापेकर, चंद्रपाल सु. रंगारी, कैलास काशिनाथ ढोले, सिकंदर क. रोकडे, सुनील चो. पाटील, अशोक दा. खोब्रागडे, हितेश दीपकराव माळोदे, कैलास का. लोखंडे, रामेश्वर पुं. बोरकर, बाळू माणिक कांबळे और प्रमोद आकाश मेश्राम सहित अन्य आरटीआई कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे।
