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उत्तर प्रदेश: सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह में 37 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल बोलीं– युवा बनें विकसित भारत के निर्माण स्तंभ
- Photo by : SOCIAL MEDIA
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु में सोमवार को विश्वविद्यालय का 10वां दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती
विस्तार
उत्तर प्रदेश: सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु में सोमवार को विश्वविद्यालय का 10वां दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उनके साथ काशी हिंदू विश्वविद्यालय की वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रो. मधुलिका अग्रवाल मुख्य अतिथि तथा उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदा के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कुलपति प्रो. कविता शाह ने सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की वार्षिक स्मारिका ‘उत्कर्ष’ तथा मासिक पत्रिका ‘कनेक्ट’ का विमोचन भी किया गया। छात्राओं ने वंदे मातरम् और विश्वविद्यालय कुलगीत प्रस्तुत कर समारोह को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बुद्ध की पावन धरती को नमन करते हुए कहा कि यह भूमि शांति, करुणा और मानवता का संदेश देने वाली है। उन्होंने स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा आधार है। साथ ही नवनिर्मित बालगृह ‘किलकारी’ तथा दिव्यांगजन सुविधायुक्त डिजिटलाइज्ड लाइब्रेरी का लोकार्पण किया। बेसिक शिक्षा विभाग की चित्रकला, कहानी कथन एवं भाषण प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर एवं महराजगंज के लिए कुल 700 आंगनबाड़ी किट वितरित कीं तथा एचपीवी टीकाकरण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। गोद लिए गए विद्यालयों को पुस्तक सेट भी भेंट किए गए और स्वास्थ्य केंद्र पर एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया गया। समारोह का समापन सामूहिक राष्ट्रगान के साथ हुआ। अंत में राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने 10वें दीक्षांत समारोह के सफल आयोजन की घोषणा की। इस अवसर पर सांसद जगदम्बिका पाल, नेता प्रतिपक्ष एवं इटवा विधायक माता प्रसाद पाण्डेय, विधायक श्यामधनी राही, विधायक विनय वर्मा, पूर्व विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन, पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन, मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह, अपर जिलाधिकारी गौरव श्रीवास्तव, कुलसचिव दीनानाथ यादव सहित विश्वविद्यालय परिवार, जनप्रतिनिधि, प्राचार्य, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि जीवन में कितनी भी ऊंचाइयां प्राप्त हों, अपने संस्कार कभी नहीं भूलने चाहिए। विद्यार्थियों से जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, नवाचार और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। राज्यपाल ने कहा कि आज छात्राओं ने एक बार फिर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। यह बदलते समाज और महिला सशक्तिकरण का सकारात्मक संकेत है। उन्होंने प्रधानमंत्री जनधन योजना, स्वच्छ भारत मिशन, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि तथा रेलवे के आधुनिकीकरण सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आत्मनिर्भर और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्य अतिथि प्रो. मधुलिका अग्रवाल ने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे अपनी शिक्षा और प्रतिभा के माध्यम से देश का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करना वर्तमान समय की आवश्यकता है। भगवान बुद्ध की करुणा, शांति और अहिंसा की शिक्षा को जीवन में अपनाकर विद्यार्थी समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दें। विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन का नया अध्याय है।
उन्होंने गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि सपने वही पूरे होते हैं जो व्यक्ति को निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश की दिशा और दशा बदल रही हैं। कुलपति प्रो. कविता शाह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2015 में स्थापित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के अंतर्गत वर्तमान में 265 महाविद्यालय संचालित हैं। परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाया गया है तथा समर्थ पोर्टल के माध्यम से सभी महाविद्यालयों को जोड़ा गया है। विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, मिशन शक्ति और डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में लगातार उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। दीक्षांत समारोह में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के कुल 37 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए, जिनमें 28 छात्राएं और 9 छात्र शामिल रहे। इसके अलावा पीएचडी उपाधिधारकों को भी उपाधियां प्रदान की गईं। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने वर्ष 2026 की डिग्रियां एवं अंकपत्र डीजी पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड किए।
