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उत्तर प्रदेश: बरेली में कान्हा उपवन में गौवंश की मौत पर हंगामा, मृत पशुओं को तालाब में डालने के आरोप से गरमाया मामला
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: सीबीगंज थाना क्षेत्र स्थित सरकारी कान्हा उपवन में गौवंशीय पशुओं की मौत और कथित अव्यवस्थाओं को लेकर शनिवार को जमकर हंगामा हुआ।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: सीबीगंज थाना क्षेत्र स्थित सरकारी कान्हा उपवन में गौवंशीय पशुओं की मौत और कथित अव्यवस्थाओं को लेकर शनिवार को जमकर हंगामा हुआ। गौशाला में पशुओं की देखभाल, उपचार और रखरखाव में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने कान्हा उपवन के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर बुलाकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब प्रदर्शनकारियों की ओर से आरोप लगाया गया कि कान्हा उपवन में मृत गौवंशीय पशुओं का नियमानुसार अंतिम निस्तारण करने के बजाय उन्हें परिसर में बने मछली पालन के तालाब में डाला जाता है। आरोप है कि मृत पशुओं को मछलियों के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। गौवंश की मौत को लेकर लोगों में आक्रोश शनिवार को गौवंशीय पशुओं की मौत की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोग कान्हा उपवन पहुंचे और वहां प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि गौशाला में पशुओं के लिए पर्याप्त देखभाल और उपचार की व्यवस्था नहीं है। उनका कहना था कि यदि समय पर बीमार पशुओं का उपचार और उचित देखरेख की जाए तो पशुओं की मौत को काफी हद तक रोका जा सकता है। प्रदर्शनकारियों ने गौशाला की व्यवस्थाओं की जांच कराने के साथ-साथ वहां तैनात कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की भी जांच कराने की मांग उठाई। लोगों का कहना था कि सरकारी गौशाला में पशुओं के संरक्षण और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी तय अधिकारियों की है, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस बल तैनात, अधिकारी मौके पर पहुंचे प्रदर्शन और हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। मामला बढ़ता देख नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य और सिटी मजिस्ट्रेट राजेश वर्मा भी कान्हा उपवन पहुंचे। अधिकारियों के सामने प्रदर्शनकारियों ने गौवंश की मौत, पशुओं की देखभाल, उपचार और मृत पशुओं के निस्तारण से जुड़े आरोपों को रखा। अधिकारियों ने पूरे मामले की जानकारी ली और मौके की स्थिति का जायजा लिया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि गौशाला में मौजूद व्यवस्थाओं की जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जांच के बाद साफ होगी आरोपों की तस्वीर कान्हा उपवन में लगे आरोपों ने सरकारी गौशालाओं में गौवंश के संरक्षण और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास तौर पर मृत पशुओं को तालाब में डालने के आरोप बेहद गंभीर हैं। हालांकि, फिलहाल यह आरोप प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए हैं और इनकी पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी। अब प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट होना है कि गौवंश की मौत किन परिस्थितियों में हुई, पशुओं के उपचार और रखरखाव की क्या व्यवस्था थी तथा मृत पशुओं के निस्तारण के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया गया या नहीं। जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी। घटना के बाद कान्हा उपवन की व्यवस्थाओं और गौवंश संरक्षण की व्यवस्था पर प्रशासन की निगरानी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
