Contact for Advertisement 9650503773


बिहार: हंडिया पंचायत के जहानपुर में एकदिवसीय पशु बांझपन निवारण शिविर का सफल आयोज

- Photo by : SOCIAL MEDIA

बिहार  Published by: Sanjay Kumar Verma , Date: 08/01/2026 06:00:56 pm Share:
  • बिहार
  • Published by: Sanjay Kumar Verma ,
  • Date:
  • 08/01/2026 06:00:56 pm
Share:

संक्षेप

बिहार: पशुपालकों की समस्याओं के समाधान व पशुधन उत्पादन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय नारदीगंज  के द्वारा हंड़िया पंचायत के  जहानपुर गांव में  एक दिवसीय पशु  बांझपन निवारण शिविर का आयोजन हुआ।

विस्तार

बिहार: पशुपालकों की समस्याओं के समाधान व पशुधन उत्पादन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय नारदीगंज  के द्वारा हंड़िया पंचायत के  जहानपुर गांव में  एक दिवसीय पशु  बांझपन निवारण शिविर का आयोजन हुआ। शिविर का नेतृत्व भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी डा. जितेंद्र दीपक,डा . नवनीत कुमार व डा इंद्रदेव कुमार  ने की। इस शिविर में 68 पशुपालकों के 127 पशुओं का निःशुल्क जांचकर उपचार व दवाई दी गई। पशु चिकित्सकों ने दूधारू पशुओं में गाय, भैंस समेत अन्य दूधारू पशुओं को जांच,उपचार के बाद निःशुल्क दवाई दिए।
जिला पशुपालन पदाधिकारी डा. दीपक कुशवाहा ने कहा कि सरकार की योजना में बिहार को मुख्य दूध उत्पादक राज्य में शामिल करना है। विभाग की स्पष्ट मंशा है कि पशुओं में बांझपन को समाप्त कर देना है। आगामी वर्षों में दुधारू पशुओं को सिर्फ बाछी उत्पन्न करने की योजना बनाई गई है।

 कार्यक्रम में पशु चिकित्सालय से मनोज कुमार,प्रदीप कुमार मनोज कुमार सिंहा ने सक्रिय भूमिका निभाई। अध्यक्षता वार्ड सदस्य तरुण देवी  ने की।  नारदीगंज प्रखंड की मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई की टीम में डा.  सुधांशु कुमार, मुकेश कुमार व ब्रजेश कुमार की भी  सहभागिता रही। जिससे शिविर की सेवाएं और अधिक प्रभावी एवं सुलभ बन सकीं। शिविर के दौरान मैत्री कर्मी संतोष चौहान, मनोज कुमार  सहित अन्य सहयोगी कर्मियों की उपस्थिति में पशुपालकों को पशु बांझपन से संबंधित समस्याओं का वैज्ञानिक तरीके से निदान किया गया।  पशु चिकित्सकों ने कहा असंतुलित पोषण, समय पर गर्भाधान न होना, हार्मोनल असंतुलन, परजीवी संक्रमण एवं उचित प्रबंधन की कमी से पशुओं में बांझपन होता है। इसके अलावा पशुओं की प्रजनन क्षमता बढ़ाने हेतु संतुलित आहार, खनिज मिश्रण, समयबद्ध टीकाकरण, कृमिनाशक दवाओं के नियमित उपयोग तथा स्वच्छ प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई।