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NCR SAMACHAR/दिल्ली: स्टेट कॉर्डिनेशन कमेटी की बैठक, विभिन्न जोन गठित करने पर बनी सहमति
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संक्षेप
NCR SAMACHAR/नई दिल्ली: दिल्ली स्टेट कॉर्डिनेशन कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आज पुरानी दिल्ली के मस्जिद शाहजहानी इलाके में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता फज़लुर्रहमान साहब ने की, जबकि दिल्ली स्टेट कॉर्डिनेशन के कन्वीनर इरफानुल्लाह खान की विशेष मौजूदगी रही। इस बैठक में दिल्ली के विभिन्न इलाकों से माइनॉरिटी समुदाय के जिम्मेदार प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
विस्तार
NCR SAMACHAR/नई दिल्ली: दिल्ली स्टेट कॉर्डिनेशन कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आज पुरानी दिल्ली के मस्जिद शाहजहानी इलाके में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता फज़लुर्रहमान साहब ने की, जबकि दिल्ली स्टेट कॉर्डिनेशन के कन्वीनर इरफानुल्लाह खान की विशेष मौजूदगी रही। इस बैठक में दिल्ली के विभिन्न इलाकों से माइनॉरिटी समुदाय के जिम्मेदार प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में दिल्ली भर में अलग-अलग जोन बनाने और हर जोन में ज़िम्मेदार नेतृत्व तैयार करने पर विस्तार से चर्चा की गई। इस पहल का उद्देश्य समुदाय को संगठित कर जमीनी स्तर पर सामाजिक मुद्दों पर प्रभावी कार्य करना है। इस अवसर पर कन्वीनर इरफानुल्लाह खान ने कहा कि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जोन लीडर नियुक्त कर लोगों को जोड़ा जाएगा, ताकि नशे की समस्या, बच्चियों के भटकाव, सामाजिक कुरीतियों और अन्य गंभीर मुद्दों पर जागरूकता फैलाते हुए ठोस कदम उठाए जा सकें। उन्होंने सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे देश और समाज के हित में अपने कीमती समय का कुछ हिस्सा समाज सेवा को दें और लोगों को जागरूक करने का कार्य करें। बैठक में रशीद साहब, कमर अहमद, आदम साहब, आसिफ साहब, अब्दुल गफ्फार साहब, डॉ. रफ़ाक़त, डॉ. हुसैन, डॉ. अदनान, सिमरन, मुज़फ्फर खान, एम. डी. सुभान, सिराज अहमद, ज़रीफुर्रहमान सहित दिल्ली के कई इलाकों से आए अन्य सम्मानित और जिम्मेदार लोग शामिल हुए। सभी ने सामाजिक सौहार्द, युवाओं की दिशा, शिक्षा और नशामुक्त समाज जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। गौरतलब है कि दिल्ली स्टेट कॉर्डिनेशन कमेटी ने पिछले वर्ष इस्लामिक कल्चर सेंटर में एक भव्य सद्भावना सम्मेलन का आयोजन किया था, जिसमें नूंह क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम सौहार्द बनाए रखने में अहम भूमिका निभाने वाली खाप पंचायतों के सदस्यों को सम्मानित किया गया था। यह कार्यक्रम देशभर में चर्चा का विषय रहा और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल के रूप में देखा गया।