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गुजरात: मकर संक्रांति पर रबाडा स्थित माँ विश्वम्भरी तीर्थधाम में भव्य गौ पूजा, गौसंवेदना एवं गौचेतना का संदेश

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गुजरात  Published by: Kamaralam Zafaralam Khan , Date: 15/01/2026 12:05:11 pm Share:
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संक्षेप

गुजरात: रबाडा, वलसाड में 'माँ विश्वम्भरी तीर्थ यात्रा धाम' में मकर संक्रांति पर भव्य गौ पूजा: गौ संवेदना एवं गौचेता जागरूकता अभियान भारतीय संस्कृति में दान और पुण्य के

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गुजरात: रबाडा, वलसाड में 'माँ विश्वम्भरी तीर्थ यात्रा धाम' में मकर संक्रांति पर भव्य गौ पूजा: गौ संवेदना एवं गौचेता जागरूकता अभियान भारतीय संस्कृति में दान और पुण्य के पर्व मकर संक्रांति के अवसर पर वलसाड के रबाडा गांव स्थित 'मां विश्वंभरी तीर्थयात्रा धाम' में गौसंवेदना और गौचेता जागरूकता अभियान के तहत विशेष गौ पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. धाम के संस्थापक श्री महापात्र के मार्गदर्शन में यहां 'वैकुंठ धाम' गौशाला में गिर गायों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक मनुष्य में गौ पूजा और गौ माता की भावना जागृत करना था। मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में धरमपुर के लोकलाडिला विधायक श्री महापात्र और गुजरात क्षेत्र के उपाध्यक्ष माननीय श्री अरविंद भाई पटेल की उपस्थिति में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और महायज्ञ और गौ पूजन का लाभ उठाया। इस शुभ दिन पर उपस्थित सभी लोगों ने गौसेवा का विशेष लाभ उठाया और अपने हाथों से गायों को हरा चारा, गोबर, अनाज, गुड़ और लड्डू खिलाकर स्वयं को धन्य महसूस किया।

भारतीय शास्त्रों में गाय को पृथ्वी पर सर्वोत्तम दिव्य प्राणी माना गया है। गायमाता भारतीय संस्कृति का गौरवपूर्ण प्रतीक है और मानव जाति को निस्वार्थ मातृ-स्नेह प्रदान करती है। विशेषकर गिर गाय या देसी गाय की पीठ पर स्थित 'सूर्यकेतु नाड़ी' सूर्य की किरणों से पोषक तत्वों को अवशोषित करती है और स्वर्ण लवण का उत्पादन करती है। गाय के दूध में मौजूद खनिज, लवण और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्व मानव स्वास्थ्य और बौद्धिक विकास के लिए उत्कृष्ट हैं। लेकिन वर्तमान समय की कड़वी सच्चाई यह है कि जो मां हमारा पालन-पोषण करती है, आज उसकी घोर उपेक्षा हो रही है। सड़क पर भूखी और असहाय घूमती गायों को देखकर संवेदनशील हृदय पिघल जाता है। ये दृश्य हमारे समाज के लिए चिंताजनक हैं अब समय आ गया है कि हर इंसान जाग जाए। मनुष्य का नैतिक कर्तव्य है कि वह ईमानदारी से धरती माता की रक्षा, पालन-पोषण के लिए आगे आए। गौसेवा न केवल पुण्य का कार्य है, बल्कि मानव अस्तित्व का ऋण चुकाने का सर्वोत्तम तरीका है। जब मनुष्य निस्वार्थ भाव से गौ माता की सेवा करेगा तो वह अवश्य ही 'ऋणमुक्त' हो जाएगा और गौ माता रास्ते में भटकना बंद कर देगी। गौ पूजन के इस कार्यक्रम के माध्यम से विश्वम्भरी तीर्थधाम ने समाज में एक सकारात्मक संदेश फैलाया है।

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