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मध्य प्रदेश: बाबासाहेब का ऐतिहासिक संदेश: बौद्ध धम्म से सामाजिक क्रांति का आह्वान
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: बोधगया बिहार डॉ. भीमराव अंबेडकर, जी जिन्हें बाबासाहेब के नाम से जाना जाता है, 6 नवंबर 1951 को बिहार आए और महाबोधि मंदिर का दौरा किया।
विस्तार
मध्य प्रदेश: बोधगया बिहार डॉ. भीमराव अंबेडकर, जी जिन्हें बाबासाहेब के नाम से जाना जाता है, 6 नवंबर 1951 को बिहार आए और महाबोधि मंदिर का दौरा किया। इस पवित्र बौद्ध स्थल पर उन्होंने सामाजिक क्रांति के बीज बोए, शोषितों को संगठित होने का आह्वान किया और महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं के माध्यम से समानता का संदेश दिया उनका यह दौरा न केवल बौद्ध धम्म के पुनरुत्थान के लिए महत्वपूर्ण था। बल्कि भारतीय समाज में व्याप्त वर्ण व्यवस्था और जाति प्रथा के खिलाफ एक सशक्त आवाज भी बन गया। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर जी 6 नवंबर 1951 की सुबह पटना पहुंचे, जहाँ से वे बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर गए। इस यात्रा के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा, "यह बौद्ध धम्म की भूमि है, यहाँ से सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत होगी। उनका मुख्य उद्देश्य दलित और शोषित वर्गों को जागरूक करना था, ताकि वे अपने अधिकारों के लिए संगठित हो सकें और समाज में बराबरी का स्थान प्राप्त कर सकें। उन्होंने इस अवसर पर सामाजिक समानता और वर्ण व्यवस्था के अंत पर जोर दिया। बोधगया से जुड़ाव महाबोधि मंदिर, जहाँ महात्मा बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था। बाबासाहेब के लिए प्रेरणा का केंद्र था। उन्होंने इस स्थल को बौद्ध धम्म के पुनरुत्थान और सामाजिक न्याय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना बाबासाहेब का मानना था कि बुद्ध की शिक्षाएँ न केवल आध्यात्मिक शांति देती हैं, बल्कि सामाजिक समानता और न्याय की भी बात करती हैं कहा कि बौद्ध धम्म का मूल संदेश ही समानता, न्याय और भ्रातृत्व है। पटना में विरोध और दृढ़त पटना में आयोजित एक जनसभा के दौरान बाबासाहेब को कड़ा विरोध झेलना पड़ा उन पर पत्थर फेंके गए, लेकिन उन्होंने अपने विचारों पर दृढ़ रहते हुए कहा, "यह क्रांति की शुरुआत है। हम पीछे नहीं हटेंगे सामाजिक परिवर्तन के लिए हमें हर चुनौती का सामना करना होगा। इस घटना ने उनके संकल्प को और मजबूत किया और उनके अनुयायियों में एक नई ऊर्जा भर दी। प्रेरणा और संदेश बाबासाहेब ने इस दौरे के माध्यम से समाज में व्याप्त वर्ण व्यवस्था और जाति प्रथा के खात्मे पर जोर दिया उन्होंने कहा कि बौद्ध धम्म का मूल संदेश समानता, न्याय और भ्रातृत्व है, और इसे अपनाकर ही एक समृद्ध और शोषण-मुक्त समाज बनाया जा सकता है। उनके इस संदेश ने न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में एक नई विचारधारा को जन्म दिया। बाबासाहेब की यह यात्रा आज भी सामाजिक न्याय और बौद्ध धम्म के अनुयायियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और जानकारी के लिए, बोधगया महाबोधि मंदिर प्रबंधन समिति या बिहार राज्य अभिलेखागार से संपर्क किया जा सकता है।
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