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मध्य प्रदेश: गाडरवारा में वन विभाग की बड़ी लापरवाही: जब्त ट्यूबवेल मशीन रातों-रात गायब, उठे मिलीभगत के सवाल

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मध्य प्रदेश  Published by: Arun Shrivastava , Date: 12/03/2026 03:39:20 pm Share:
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  • 12/03/2026 03:39:20 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश:  नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में वन विभाग की कार्रवाई अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। वन भूमि पर अवैध बोरिंग करते हुए पकड़ी गई ट्यूबवेल मशीन वन विभाग की पकड़ से ही कथित रूप से रातों-रात फरार हो गई। हैरानी की बात यह है

विस्तार

मध्य प्रदेश:  नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में वन विभाग की कार्रवाई अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। वन भूमि पर अवैध बोरिंग करते हुए पकड़ी गई ट्यूबवेल मशीन वन विभाग की पकड़ से ही कथित रूप से रातों-रात फरार हो गई। हैरानी की बात यह है कि मशीन जब्त होने के बाद दो वन रक्षकों की निगरानी में थी, इसके बावजूद मशीन गायब हो गई। अब इस पूरे मामले में लापरवाही के साथ-साथ मिलीभगत के आरोप भी उठने लगे हैं।
नरसिंहपुर जिले की तहसील गाडरवारा के चीचली ब्लॉक क्षेत्र में वन विभाग ने 9 मार्च 2026 को वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण और अवैध खुदाई के खिलाफ कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार उपवन मंडल अधिकारी गाडरवारा सुनील वर्मा के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई थी। टीम ने वन परिक्षेत्र गाडरवारा के कक्ष क्रमांक RF-333 बीट रातीकरार में कार्रवाई करते हुए वन भूमि पर चल रही अवैध बोरिंग को पकड़ा। मौके पर एक ट्यूबवेल मशीन से वन भूमि को नुकसान पहुंचाते हुए बोरिंग कार्य किया जा रहा था, जिसे वन विभाग की टीम ने जब्त कर लिया। कार्रवाई के दौरान उपवन मंडल अधिकारी सुनील वर्मा सहित कई वन कर्मचारी मौके पर मौजूद थे और मशीन को जब्त करते हुए फोटो और वीडियो भी वायरल हुए।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जब्त की गई मशीन को हाइड्रा की मदद से खींचकर ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन मशीन खराब होने के कारण उसे मौके से हटाया नहीं जा सका। इसके बाद मशीन की निगरानी के लिए उपवन मंडल अधिकारी गाडरवारा सुनील वर्मा के नेतृत्व में वन रक्षक प्रिंस साहू और विवेक भट्ट को ड्यूटी पर तैनात किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिन दो वन रक्षकों की निगरानी में मशीन रखी गई थी, उसी निगरानी के बीच से ट्यूबवेल मशीन रातों-रात गायब हो गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब मशीन वन विभाग द्वारा रंगे हाथों पकड़ी जा चुकी थी और उसकी निगरानी के लिए दो वन रक्षक तैनात थे, तो फिर इतनी बड़ी मशीन वहां से कैसे गायब हो गई। सूत्रों का कहना है कि इतनी बड़ी बोरवेल मशीन को बिना विभागीय जानकारी के हटाना आसान नहीं है। ऐसे में यह मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं बल्कि मिलीभगत का भी हो सकता है।

मिलीभगत की आशंका वन परिक्षेत्र अधिकारी गाडरवारा के अनुसार यह ट्यूबवेल मशीन पिपरिया क्षेत्र के नरेंद्र रघुवंशी की बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि मशीन बाद में पिपरिया क्षेत्र तक पहुंच गई, जिससे पूरे मामले में संदेह और गहरा गया है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि मशीन को फरार कराने में लाखों रुपये के लेन-देन की भी संभावना हो सकती है। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब मांग उठ रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वन भूमि पर खुदाई किसके इशारे पर हो रही थी और जब्ती के बाद मशीन को फरार कराने में किन लोगों की भूमिका रही। फिलहाल वन विभाग की ओर से मामले की जांच की बात कही जा रही है, लेकिन जब्त की गई मशीन का गायब होना पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह होगा कि जांच में क्या सच्चाई सामने आती है और इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।


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