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मध्य प्रदेश: 53 पंचायतों के अस्पताल में न महिला चिकित्सक, न स्पेशलिस्ट, मरीज रेफर होने को मजबूर

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh Tomar , Date: 22/01/2026 03:49:54 pm Share:
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: 53 पंचायत के अस्पताल में नहीं है महिला चिकित्सक तथा स्पेशलिस्ट डॉक्टर मरीज होते हैं परेशान 2005 में स्वास्थ्य मंत्री रहे रुस्तम सिंह जी के द्वारा और सात स्पेशलिस्ट सा डॉक्टर की नियुक्ति का आदेश जारी किया था

विस्तार

मध्य प्रदेश: 53 पंचायत के अस्पताल में नहीं है महिला चिकित्सक तथा स्पेशलिस्ट डॉक्टर मरीज होते हैं परेशान 2005 में स्वास्थ्य मंत्री रहे रुस्तम सिंह जी के द्वारा और सात स्पेशलिस्ट सा डॉक्टर की नियुक्ति का आदेश जारी किया था जिसके डॉक्टर आज 20 साल के अंदर भी नहीं आ पाए। बिना स्पेशलिस्ट और महिला चिकित्सक के भगवान भरोसे चल रहा पोरसा स्वास्थ्य केंद्र प्रसूता महिलाएं, दुर्घटनाग्रस्त मरीज मजबूरन जिला अस्पताल या ग्वालियर हो रहे रेफर क्षेत्र की हजारों की आबादी के लिए बना पोरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आज खुद इलाज का मोहताज नजर आ रहा है। बिना किसी स्पेशलिस्ट डॉक्टर और बिना स्थायी महिला चिकित्सक के यह अस्पताल महज तीन डॉक्टरों के सहारे संचालित हो रहा है, जिससे आम जनता खासकर महिलाएं और गंभीर मरीज भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

पोरसा स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉक्टरों में एक महिला डॉक्टर शामिल हैं, लेकिन वे नियमित रूप से अस्पताल में उपस्थित नहीं रहतीं। नतीजतन गर्भवती महिलाओं की जांच और प्रसव संबंधी उपचार के लिए कोई महिला चिकित्सक उपलब्ध नहीं है। मजबूरन प्रसूता महिलाओं को मुरैना जिला अस्पताल या ग्वालियर रेफर किया जा रहा है। अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ सहित अन्य आवश्यक स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का पूर्ण अभाव है। पोरसा क्षेत्र में आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन ऑर्थोपेडिक डॉक्टर न होने के कारण घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल भेज दिया जाता है। इससे समय की बर्बादी के साथ-साथ मरीजों की जान पर भी खतरा बढ़ जाता है।

फिलहाल पोरसा स्वास्थ्य केंद्र तीन डॉक्टरों—ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. शैलेंद्र सिंह तोमर, डॉ. विनोद शाक्य और डॉ. राहुल शर्मा—के भरोसे चल रहा है। जब डॉक्टरों की अधिक आवश्यकता पड़ती है, तब महुआ में पदस्थ डॉ. पुष्पेंद्र दंडोतिया, नगरा अस्पताल से डॉ. मयंक शर्मा, परिक्षतपुरा से डॉ. निलेश यादव तथा संजीवनी पोरसा के संचालन न होने के कारण डॉ. अरविंद लोधी को अस्थायी रूप से पोरसा बुलाया जाता है। मिथिलेश तोमर का कहना है कि यहां महिला चिकित्सक के न होने से छोटी से छोटी बीमारी के लिए मुरैना जाना पड़ता है सुनील सखवार जगदीशगढ़ का कहना है कि पोरसा में स्पेशलिस्ट डॉक्टर के न होने से हम लोगों को मुरैना इलाज के लिए जाना पड़ता है जिससे अनावश्यक खर्च होता है हम लोग गरीब तबके की हैं पैसा कहां से लाएं। 

मुकेश शर्मा अध्यक्ष ब्राह्मण समाज का कहना है की 2005 में स्वास्थ्य मंत्री ने पोरसा में महिला चिकित्सक तथा स्पेशलिस्ट डॉक्टर की नियुक्ति का आदेश जारी किया जिसके  डॉक्टर आज तक  अस्पताल में देखने को नहीं मिले जिससे हम सभी लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है इस गंभीर स्थिति को लेकर जब पोरसा ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. शैलेंद्र सिंह तोमर से चर्चा की गई, तो उन्होंने बताया कि स्पेशलिस्ट और महिला डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए विभाग को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सवाल यह है कि आखिर कब तक पोरसा की जनता रेफर सिस्टम के सहारे जीती रहेगी? कब मिलेगा गर्भवती महिलाओं को उनके क्षेत्र में सुरक्षित इलाज? और कब पोरसा स्वास्थ्य केंद्र वास्तव में “स्वास्थ्य केंद्र” बन पाएगा? पोरसा की जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहती है।
 

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