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उत्तर प्रदेश: जीवनशैली और संक्रामक रोग तेजी से बढ़ रहे हैं: प्रो. डॉ. स्मिता गुप्ता
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: SRMS मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की एचओडी प्रोफेसर डॉ. स्मिता गुप्ता ने आमजन को बढ़ती जीवनशैली जनित और संक्रामक बीमारियों को लेकर जागरूक किया है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: SRMS मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की एचओडी प्रोफेसर डॉ. स्मिता गुप्ता ने आमजन को बढ़ती जीवनशैली जनित और संक्रामक बीमारियों को लेकर जागरूक किया है। उन्होंने कहा कि बदलती दिनचर्या, अनियमित खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ता मानसिक तनाव आज कई गंभीर बीमारियों की मुख्य वजह बन चुके हैं। वर्तमान समय में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, थायराइड, एनीमिया, मोटापा, फैटी लिवर, किडनी रोग और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही मौसम परिवर्तन के दौरान वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया, टायफाइड और श्वसन संक्रमण के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। लगातार थकान रहना, सिरदर्द, चक्कर आना, सांस फूलना, सीने में दर्द, हाथ-पैरों में सूजन, भूख में बदलाव, बार-बार प्यास लगना और पेशाब आना, वजन का अचानक बढ़ना या घटना, लंबे समय तक बुखार, खांसी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। बचाव के उपायों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि संतुलित और पौष्टिक आहार, हरी सब्जियां, फल, दालें और पर्याप्त पानी का सेवन बेहद जरूरी है। रोजाना कम से कम 30 मिनट की सैर, योग या हल्का व्यायाम करने से कई बीमारियों से बचा जा सकता है। नमक, चीनी और तले-भुने भोजन का सीमित सेवन, धूम्रपान और नशे से परहेज तथा तनाव से दूरी बनाए रखना भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। उन्होंने यह भी कहा कि 30 वर्ष की आयु के बाद नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, शुगर, थायराइड, कोलेस्ट्रॉल और अन्य जरूरी जांच करानी चाहिए। इलाज को लेकर डॉ. गुप्ता ने स्पष्ट किया कि स्वयं दवा लेना या घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है। सही समय पर जांच और विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह से किया गया इलाज ही सुरक्षित और प्रभावी होता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और समय पर उपचार से अधिकांश बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है और मरीज सामान्य, स्वस्थ जीवन जी सकता है। अंत में उन्होंने आमजन से अपील की कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और किसी भी लक्षण को हल्के में न लें।
डॉ. स्मिता गुप्ता ने बताया कि इन बीमारियों के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं, जिस कारण लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।