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मध्य प्रदेश: दुकान नंबर 17 नामांतरण मामला नप अध्यक्ष ने पूर्व सीएमओ से सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग की
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: नगर परिषद के बस स्टैंड स्थित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की दुकान नम्बर 17 के नामांतरण के मामले में नया मोड़ आ गया है। दुकान के नामांतरण की फाइल पूर्व सीएमओ के पास होने की बात से उन्होंने इनकार कर दिया है।
विस्तार
मध्य प्रदेश: नगर परिषद के बस स्टैंड स्थित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की दुकान नम्बर 17 के नामांतरण के मामले में नया मोड़ आ गया है। दुकान के नामांतरण की फाइल पूर्व सीएमओ के पास होने की बात से उन्होंने इनकार कर दिया है। जबकि इतने दिनों से नगर परिषद द्वारा मामले की फाइल पूर्व सीएमओ के पास होने की बात कहीं कही जा रही थी। पूर्व सीएमओ के इंकार के बाद नगर परिषद अध्यक्ष ने उनपर जवाबी हमला करते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। नगर परिषद अध्यक्ष दीपमाला नलवाया ने कहा है कि पूर्व सीएमओ द्वारा राणापुर आकर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दे। ज्ञात रहे कि दुकान नम्बर 17 के नामांतरण को लेकर नगर परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व पार्षदों ने नगर परिषद को एक पत्र लिखा था जिसमे - उन्होंने बताया था कि दुकान का नामांतरण बिना उनके संज्ञान में किया गया है। इसे निरस्त किया जाए। मामले की फाइल भी नगर परिषद में नहीं मिली थी। नामांतरण प्रभारी जालुसिंह वसुनिया से जवाब तलब करने पर उसने लिखित में बताया था कि फाइल पूर्व सीएमओ अपने साथ ले गए हैं। वसुनिया ने यह भी बताया कि जब फाइल लेने वह पूर्व सीएमओ के यहाँ राऊ गए तो उन्होंने कहा कि फाइल उनके पास सुरक्षित रखी है। अब पूर्व सीएमओ फाइल अपने पास होने से इंकार कर रहे हैं। नप अध्यक्ष ने यह उठाए सवाल नगर परिषद से संबंधित एक महत्वपूर्ण फाइल के मामले में सीएमओ द्वारा यह कहा जाना कि फाइल उनके पास नहीं है, जबकि उसी विषय में राजस्व विभाग को यह बताया गया कि फाइल मेरे पास है -यह विरोधाभासी है और गंभीर सवाल खड़े करता है। इस पूरे प्रकरण में न केवल मेरे, बल्कि नगर परिषद के किसी भी कर्मचारी के फोन कॉल तक नहीं उठाए गए। जबकि मामला पूरी तरह शासकीय कार्य और जनहित से जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही इस प्रकरण में और भी गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं। जब नामांतरण वर्ष 2023 में केला पति कालू के नाम हो चुका था, तो फिर वर्ष 2024 में प्रताप मालसिंह के बेटे के लिए किस आधार पर दुकान खाली करवाई गई? इस संबंध में जब मैंने लिखित आदेश / पत्र की मांग की, तो वह मुझे उपलब्ध नहीं कराया गया। जब 2023 में ही दुकान केलापति के नाम दर्ज हो चुकी थी, तो फिर वर्ष 2025 तक दुकान की रसीदें प्रताप मालसिंह के नाम से क्यों काटी जाती रहीं? ये सभी तथ्य यह दशातें हैं कि कहीं न कहीं नियमों की अनदेखी की गई है और जानबूझकर भ्रम की स्थिति बनाई गई है। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहती हूँ कि मेरा किसी भी अधिकारी या कर्मचारी से कोई व्यक्तिगत वैर या दुश्मनी नहीं है। मेरा उद्देश्य केवल इतना है कि फाइल की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो, नियमों के अनुसार कार्य हो और जनहित के मामलों में पारदर्शिता बनी रहे। राणापुर सार्वजनिक रूप से जवाब की मांग-मैं मांग करती हूँ कि इन सभी बिंदुओं पर संबंधित अधिकारी राणापुर आकर सार्वजनिक रूप से जवाब दें, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके और विश्वास बना रहे।
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