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नई दिल्ली: जामिया की संस्थागत गरिमा पर हमला नाकाम: टीचिंग-नॉन टीचिंग स्टाफ का VC और रजिस्ट्रार को खुला समर्थन, पुलिस में शिकायत दर्ज

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नई दिल्ली  Published by: Qamar Ali Idrisi , नई दिल्ली  Edited By: Namita Chauhan, Date: 31/08/2026 11:00:21 am Share:
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  • Edited By.: Namita Chauhan,
  • Date:
  • 31/08/2026 11:00:21 am
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संक्षेप

क़मर अहमद/नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा सुनियोजित दुष्प्रचार अब खुद ही एक्सपोज हो गया है। विश्वविद्यालय के कुलपति (VC) के सैद्धांतिक और कानून-सम्मत फैसलों को गलत तरीके से पेश करने और रजिस्ट्रार प्रो. मुहम्मद मेहताब आलम रिज़वी के खिलाफ चल रहे कुप्रचार के खिलाफ खुद जामिया परिवार एकजुट होकर खड़ा हो गया है।

विस्तार

क़मर अहमद/नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा सुनियोजित दुष्प्रचार अब खुद ही एक्सपोज हो गया है। विश्वविद्यालय के कुलपति (VC) के सैद्धांतिक और कानून-सम्मत फैसलों को गलत तरीके से पेश करने और रजिस्ट्रार प्रो. मुहम्मद मेहताब आलम रिज़वी के खिलाफ चल रहे कुप्रचार के खिलाफ खुद जामिया परिवार एकजुट होकर खड़ा हो गया है।

प्रतिष्ठित अखबार 'जर्नलिज़्म टुडे' ने भी अपने 16 अगस्त 2026 के अंक में इस पूरे मामले को "प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिज़वी के खिलाफ प्रोपेगेंडा एवं सोची-समझी साजिश" करार दिया है।

VC साहब का स्टैंड एकदम सही और नियमानुसार

विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार कुलपति महोदय ने पूरे मामले में जो भी निर्णय लिए हैं, वे पूरी तरह से जामिया के एक्ट, स्टैच्यूट और UGC के नियमों के तहत हैं। VC साहब किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आए और उन्होंने संस्थान की स्वायत्तता को सर्वोपरि रखा।

रजिस्ट्रार प्रो. रिज़वी के खिलाफ साजिश बेनकाब, जामिया परिवार एकजुट

इस पूरे मामले का सबसे मजबूत पहलू 21 अगस्त 2026 को जामिया नगर पुलिस स्टेशन में दी गई लिखित शिकायत है। जामिया के शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से यह शिकायत पुलिस को सौंपी है।

प्रो. रिज़वी की योग्यता पर सवाल उठाना ही गलत

जिन प्रो. मेहताब आलम रिज़वी को निशाना बनाया जा रहा है, वे देश के प्रतिष्ठित थिंक-टैंक IDSA, नई दिल्ली में फेलो रह चुके हैं और नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट रिज़ॉल्यूशन के निदेशक रह चुके हैं।

बड़ी तादाद में विश्वविद्यालय कर्मचारियों का समर्थन वीसी साहब के साथ है, यही इस बात का सुबूत है कि विश्वविद्यालय के कर्मचारी अपने वीसी के साथ मजबूती से खड़े हैं।