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राजस्थान: छापाला भैरूजी मंदिर में 800 क्विंटल चूरमा प्रसाद से रचा जाएगा इतिहास
- Photo by : social media
संक्षेप
राजस्थान: कोटपूतली क्षेत्र के कुहाड़ा गांव में स्थित छापाला भैरूजी मंदिर में जहाँ श्रद्धा, भक्ति और अपनेपन की नदियाँ एक साथ बहती हैं।
विस्तार
राजस्थान: कोटपूतली क्षेत्र के कुहाड़ा गांव में स्थित छापाला भैरूजी मंदिर में जहाँ श्रद्धा, भक्ति और अपनेपन की नदियाँ एक साथ बहती हैं। राजस्थान की धरा पर जब भक्ति अपने चरम पर होती है, तब दृश्य केवल आँखों से नहीं—मन से देखा जाता है। कोटपूतली क्षेत्र के कुहाड़ा गांव में स्थित छापाला भैरूजी मंदिर में होने वाला यह आयोजन ऐसा ही एक अद्भुत उदाहरण है, जहाँ आस्था तकनीक से मिलती है और परंपरा आधुनिक साधनों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलती है। 30 जनवरी 2026 को मंदिर के 17वें वार्षिकोत्सव और लक्खी मेले के अवसर पर यहाँ इतिहास रचा जा रहा है—लगभग 800 क्विंटल (51,500 किलो से अधिक) चूरमा प्रसाद का निर्माण। यह केवल मात्रा का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सामूहिक श्रम और साझा विश्वास की मिसाल है। इस महाप्रसादी की तैयारी अपने आप में अनूठी है। 450 क्विंटल गोबर के उपलों पर रोट (बांटे) सेके गए।
सेके गए रोटों को थ्रेसर से पीसा गया। फिर JCB मशीन की मदद से देसी घी, खांड और मेवे मिलाकर चूरमा तैयार किया जा रहा है। यह दृश्य बताता है कि जब उद्देश्य पवित्र हो, तो आधुनिक साधन भी भक्ति के सेवक बन जाते हैं। 30 जनवरी को लगने वाले लक्खी मेले में लगभग 3 लाख श्रद्धालुओं के लिए यह महाप्रसादी तैयार की जा रही है। चूरमे के साथ दाल, दही और चाय की भी व्यवस्था है—ताकि हर आगंतुक तृप्ति और अपनापन महसूस करे। आयोजन की शोभा बढ़ाती है 3 किलोमीटर लंबी भव्य कलश यात्रा, जिसमें गाँव-शहर, जाति-वर्ग की सीमाएँ घुल जाती हैं। सिर पर कलश, होठों पर भजन और दिल में एक ही भाव—सेवा।
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